न्यूयॉर्क: वैज्ञानिकों की एक टीम ने मस्तिष्क के ऐसे नए हिस्सों का पता लगाया है, जो सामाजिक संपर्को (सोशल इंटरैक्शन) में मदद करते हैं। ये पुराने हिस्से, जैसे एमिग्डाला (जो डर और भावनाओं से जुड़ा होता है) से जुड़े रहते हैं और हमेशा आपस में संपर्क में रहते हैं। इस खोज से चिंता और डिप्रैशन जैसी मानसिक समस्याओं का इलाज करने में मदद मिल सकती है। अमरीका के शिकागो स्थित नॉर्थवैस्टर्न मैडीसन के एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बेहतर ढंग से यह जानने की कोशिश की कि इंसान कैसे इतने माहिर हो गए कि वे दूसरों के दिमाग (मस्तिष्क) में क्या चल रहा है, इसके बारे में सोच सकें। यह अध्ययन साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है। वरिष्ठ लेखक रोड्रिगो ब्रागा ने कहा, ‘हम बहुत समय यह सोचने में बिताते हैं कि वह व्यक्ति क्या महसूस कर रहा है, क्या सोच रहा है? क्या मैंने उसे परेशान करने वाली कोई बात कही है? मस्तिष्क के वे भाग जो हमें ऐसा करने की अनुमति देते हैं, मानव मस्तिष्क के उन क्षेत्रों में हैं जो हमारे विकास में हाल ही में विस्तारित हुए हैं और इसका अर्थ है कि यह एक हाल ही में विकसित प्रक्रिया है। ब्रागा ने आगे कहा, ‘आप खुद को किसी दूसरे के दिमाग में रखकर यह अनुमान लगा रहे हैं कि वह व्यक्ति क्या सोच रहा है, जबकि आप वास्तव में यह नहीं जान सकते।‘
वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की गतिविधि को किया डिकोड, अवसाद के इलाज में मिल सकती है मदद

