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डिप्रेशन और एंग्जायटी के संकेत, इन्हें अनदेखा करना खतरनाक

डिप्रेशन और एंग्जायटी के संकेत, इन्हें अनदेखा करना खतरनाक

डिप्रेशन और एंग्जायटी के संकेत, इन्हें अनदेखा करना खतरनाक

नई दिल्ली: शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है। हालांकि लोग तन से जुड़ी बीमारियों पर ध्यान देते हैं, मन और मस्तिष्क की परेशानियों की ओर ध्यान कम देते हैं। डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। इसलिए इनके लक्षणों को पहचानना और समय रहते चिकित्सक से सलाह लेना बहुत जरूरी है।

आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में वात दोष बढ़ जाता है, तो मन भय, चिंता और बेचैनी में उलझने लगता है। वहीं आधुनिक चिकित्सा में डिप्रेशन को मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन की कमी से जोड़ा गया है, जो खुशी और संतुलन बनाए रखते हैं। इन हार्मोन की कमी होने पर व्यक्ति चिंता, थकान और काम में अवसाद महसूस करता है।

डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षणों में अचानक घबराहट, काम न करने की इच्छा, अकेले रहकर रोने का मन, नींद और भूख में बदलाव, और दिल की धड़कन तेज होना शामिल हैं। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

आयुर्वेद में राहत के लिए अश्वगंधा, ब्राह्मी, जटामांसी, शंखपुष्पी, तुलसी और इलायची का सेवन लाभकारी माना गया है। ये जड़ी-बूटियां तनाव कम करने, मस्तिष्क को शांत रखने और नींद सुधारने में मदद करती हैं।

साथ ही योग और प्राणायाम भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए कारगर हैं। सूर्य नमस्कार, भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और मेडिटेशन मस्तिष्क में ऑक्सीजन बढ़ाकर तनाव कम करते हैं। प्रकृति के करीब समय बिताना और नियमित प्राणायाम करना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

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