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बार-बार खाने की आदत कर रही पाचन शक्ति को कमजोर

नई दिल्ली : खाना सिर्फ पेट भरने का साधन ही नहीं बल्कि शरीर को ऊर्जा और बल देने का प्राकृतिक तरीका है। दिन में तीन समय का भोजन शरीर के लिए अमृत समान होता है और बीमारियों से बचाता है, लेकिन आज के समय में ये माना जाने लगा है कि थोड़ा-थोड़ा खाते रहना ही अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है, लेकिन ये धारणा गलत है। आयुर्वेद में भोजन को संस्कार, साधना और बल से जोड़कर देखा गया है। आयुर्वेद कहता है स्वास्थ्य भोजन की मात्र से नहीं, भोजन के समय से बनता है।

भोजन को शरीर में पचने में समय लगता है और उस दौरान दोबारा कुछ खा लिया जाता है, तो पेट की पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है। पेट की पाचन अग्नि ही निर्धारित करती है कि खाना अच्छे से पचने के बाद वह पाचन रस बनेगा या फिर सड़ जाएगा। अगर पाचन अग्नि तेज है तो खाना पचाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी और अगर कमजोर है तो खाना पेट में ही सड़ना शुरू हो जाता है, क्योंकि पेट के एंजाइम खाने को अच्छे से तोड़कर पाचन रस में नहीं बदल पाते हैं। इससे फिर पेट संबंधी परेशानी जैसे गैस बनना, पेट का फूलना और कब्ज की परेशानी होती है।

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