Last Updated: October 16, 2026

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दिमाग की रफ्तार बढ़ाने के लिए लोग घर पर ले रहे बिजली के झटके!

February 13, 2023

दिमाग की रफ्तार बढ़ाने के लिए लोग घर पर ले रहे बिजली के झटके!

कोरोना महामारी के बाद से ही ब्रेन फॉग शब्द का इस्तेमाल होता आया है। हैल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों को लगातार भूलने या फोकस करने में दिक्कत हो रही है। ये कोरोना का एक साइड इफैक्ट है। अब इससे निपटने के लिए लोग एक अजीबोगरीब तरीका अपना रहे हैं। वे खुद को बिजली के झटके दे रहे हैं। यह अपने आप में कोई मैडीकल प्रॉब्लम नहीं है, बल्कि इससे होने वाला साइड इफैक्ट है। ब्रेन फॉग की कंडीशन में व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से बदलाव आता है। ऐसे लोगों में हमेशा थकान, चिड़चिड़ापन, डिप्रैशन, सिर दर्द, किसी काम में मन न लगना, नींद न आना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं।

कैफीन जैसे इस्तेमाल हो सकती है तकनीक
रसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में कैफीन जैसे इस्तेमाल हो सकती है। यानी आज जिस तरह ब्रेन एक्टिविटी को बढ़ाने के लिए लोग कॉफी या चाय पीते हैं, उसी तरह एक दिन अपने दिमाग को झटके देंगे। फिलहाल घर पर ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक को इस्तेमाल करने वाले यूजर्स का कहना है कि उन्हें इससे फायदा हो रहा है। उनका दिमाग पहले से ज्यादा अलर्ट बन गया है।

कुछ साइड इफैक्ट्स भी हो सकत
ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक को आमतौर पर अस्पतालों में डाक्टर्स की देखरेख में आजमाया जाता है। आज घर पर हो रहे इसके इस्तेमाल ने हैल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। पेनसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की प्रो. ऐना वेक्सलर ने कहा- घर पर ब्रेन स्टिमुलेशन के जरिए मैंटल हैल्थ डिसऑर्डर्स को ठीक करने का ट्रैंड बढ़ा है। इसमें डिप्रैशन और एंग्जाइटी सबसे ऊपर हैं। यूजर्स एट-होम ब्रेन स्टिमुलेशन डिवाइस को दिन में दो बार इसे 20 मिनट के लिए इस्तेमाल करते हैं। हावर्ड मैडीकल स्कूल के डा. माइकल फॉक्स का कहना है कि लोगों के लिए घर पर मैंटल हेल्थ का इलाज करना एक्साइटिंग है, इसलिए यह ट्रेंड बढ़ रहा है। हालांकि, इसके कुछ साइड इफैक्ट्स भी हो सकते हैं। इनमें खुजली, झुनझुनी और त्वचा जलना शामिल है।

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