
योगासन भारत की प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा हैं, जो शरीर के साथ-साथ मन को भी स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है विपरीतकरणी मुद्रा, जिसे पाचन सुधारने से लेकर थायरॉयड को संतुलित रखने तक के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से सेहत को कई तरह के लाभ मिलते हैं।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के अनुसार, विपरीतकरणी मुद्रा एक सरल योग अभ्यास है, जिसमें व्यक्ति दीवार के सहारे लेटकर पैरों को ऊपर की ओर उठा लेता है। इस स्थिति में शरीर हल्का उल्टा रहता है, जिससे प्राण ऊर्जा ऊपर की ओर प्रवाहित होती है और गुरुत्वाकर्षण का सकारात्मक असर शरीर के अलग-अलग अंगों पर पड़ता है।
योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुद्रा का सबसे पहला फायदा पाचन तंत्र पर पड़ता है। यह पेट के अंगों को सक्रिय करती है, जिससे भोजन अच्छे से पचता है और पाचन शक्ति मजबूत होती है। कब्ज की समस्या में भी यह काफी असरदार मानी जाती है। खासकर लंबे समय तक बैठकर काम करने या अनियमित खानपान की वजह से होने वाली कब्ज में इससे राहत मिलती है, क्योंकि यह आंतों में रक्त संचार बढ़ाती है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी विपरीतकरणी मुद्रा काफी लाभकारी है। इसके अभ्यास से दिमाग शांत रहता है, मानसिक सतर्कता बढ़ती है और एकाग्रता में सुधार होता है। तनाव और चिंता कम होने से व्यक्ति खुद को ज्यादा हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।
त्वचा और बालों के लिए भी यह मुद्रा खास मानी जाती है। चेहरे और सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ने से त्वचा को बेहतर पोषण मिलता है, जिससे निखार आता है। साथ ही बालों से जुड़ी समस्याएं भी कम होती हैं और बाल मजबूत व चमकदार बनते हैं।
इस मुद्रा का एक और बड़ा फायदा थायरॉयड ग्रंथि पर पड़ता है। गर्दन के हिस्से में रक्त संचार बेहतर होने से थायरॉयड का कामकाज सुधरता है और हाइपोथायरॉयड जैसी समस्याओं में यह सहायक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इसे रोजाना किया जाए तो शरीर और मन दोनों में संतुलन बना रहता है। शुरुआत में 5 से 10 मिनट तक अभ्यास करना बेहतर रहता है और बाद में धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं, हाई ब्लड प्रेशर या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को यह मुद्रा करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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