मुंबई: धरती पर जब भी हम दिया जलाते हैं तो आसपास का अंधेरा हट जाता है और ऐसा दिखता है कि उजाला चारों और फैल गया है। लेकिन जब भी हम रात को अंतरिक्ष की ओर देखते हैं तो हमें टिमटिमाते तारे दिखाई देते हैं जबकि आसामान पूरा का पूरा काला या अंधेरे में ही डूबा दिखाई देता है। एक दलील यह दी जा सकती है कि अंतरिक्ष में तारे भले ही भारी मात्रा में हों लेकिन उनके बीच की दूरी भी कम अधिक नहीं हैं और ज्यादा दूरी होने से उनकी चमक फीकी होती जाती है।
10 गुना अधिक दूरी पर तारे की चमक सौ गुना कम हो जाती है. लेकिन यह हमारे सवाल का पूरा उत्तर नहीं है। एक तो तारे स्थिर नहीं है और ब्रह्माण्ड केवल 13 अरब वर्ष पुराना ही है। यह इंसान के लिहाज से बहुत ही अधिक समय हो, लेकिन ब्रह्माण्डीय नजरिए से बहुत ही कम समय है।सुदूर तारों की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच सकी है।
यानि हम उन्हीं तारों को देख पा रहे हैं जो पृथ्वी से केवल 13 अरब प्रकाशवर्ष की दूरी तक फैले हैं। यदि यह बुलबुला 10 प्रकाशवर्ष बड़ा हो तो इसमें करीब एक दर्जन तारे होंगे लेकिन कई प्रकाशवर्ष की दूरी होने पर ये तारे धुंधले दिखेंगे। बुलबुला हजार प्रकाशवर्ष या एक करोड़ या फिर एक अरब प्रकाशवर्ष बड़ा होने पर यह दूरस्थ तारे और धुंधले दिखेंगे। लेकिन बुलबुले में तारों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी और इससे आसमान में चमक आनी चाहिए।

