Last Updated: October 8, 2026

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नाना पाटेकर के निधन से शोक में डूबा देश, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

October 8, 2026

नाना पाटेकर के निधन से शोक में डूबा देश, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

मुंबईः हिंदी सिनेमा और मराठी रंगमंच के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत समेत पूरे देश में शोक की लहर है। 75 साल की उम्र में अभिनेता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके अचानक निधन से परिवार, प्रशंसकों और फिल्म इंडस्ट्री में गहरा दुख है।

महाराष्ट्र सरकार ने किया बड़ा ऐलान
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर से फोन पर बातचीत की और परिवार के प्रति संवेदना जताई। मुख्यमंत्री ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया। साथ ही सरकार की ओर से नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार की तैयारियां राजकीय सम्मान के साथ करने की बात कही गई है।

गोवा स्थित घर पर बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, नाना पाटेकर अपने गोवा स्थित घर पर थे। घटना के समय उनके साथ उनके भतीजे प्रसाद पाटेकर भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि नाना पाटेकर को बीती रात से ही सिरदर्द की शिकायत थी। गुरुवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत हो गए। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

75 साल की उम्र में हुआ निधन
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में हुआ था। करीब पांच दशकों के लंबे करियर में उन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ मराठी रंगमंच और फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और गंभीर अभिनय दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। उन्होंने पर्दे पर कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें आज भी याद किया जाता है।

इन फिल्मों में छोड़ी अमिट छाप
नाना पाटेकर ने अपने शानदार अभिनय से कई फिल्मों को यादगार बनाया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘वेलकम’, ‘टैक्सी नंबर 9211’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब पसंद किया गया। मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में भी उनके अभिनय की जमकर तारीफ हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला।

सिर्फ अभिनेता ही नहीं, समाजसेवी भी थे नाना
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता के तौर पर ही नहीं थी। वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते थे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। इस संस्था के जरिए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में किसानों की मदद की गई। इसके अलावा जल संरक्षण, किसान आत्महत्या रोकने की कोशिश और किसानों के बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दों पर भी काम किया गया।

सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे नाना
नाना पाटेकर ने अपने दमदार अभिनय और अलग अंदाज से हिंदी और मराठी सिनेमा में खास मुकाम बनाया। उनकी आवाज और संवाद अदायगी की अपनी अलग पहचान थी।
उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसने अभिनय के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी पूरी गंभीरता से निभाया। उनके प्रशंसक और साथी कलाकार उन्हें लंबे समय तक उनके शानदार अभिनय और समाजसेवा के लिए याद रखेंगे।

 

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