नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में गिरती जनसंख्या दर को लेकर चिंता जताते हुए नई जनसंख्या प्रबंधन नीति का प्रस्ताव रखा है। इस नीति के तहत सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर आर्थिक प्रोत्साहन, माता-पिता को विशेष अवकाश और महिलाओं के लिए कई सुविधाएं देने की योजना बना रही है। सरकार का लक्ष्य इस नीति को मार्च के अंत तक अंतिम रूप देकर 1 अप्रैल से लागू करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य सरकार जनसंख्या वृद्धि को बोझ नहीं बल्कि एक वरदान के रूप में देख रही है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि आंध्र प्रदेश में कुल प्रजनन दर (TFR) तेजी से कम हो रही है। वर्ष 1993 में TFR 3.0 थी और अब घटकर 1.5 रह गई है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में युवा कार्यबल की कमी हो सकती है, जिससे राज्य के आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य को आगे चलकर जापान, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों की तरह बुजुर्ग आबादी बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2023 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में हर साल करीब 6.70 लाख बच्चों का जन्म दर्ज हो रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो 2047 तक बुजुर्गों की आबादी लगभग 23 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो आर्थिक विकास के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए महिला कार्यबल की भागीदारी 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 59 प्रतिशत करना जरूरी है।
नई नीति के तहत सरकार महिलाओं और बच्चों के लिए पांच चरणों वाला लाइफ-साइकिल सिस्टम लागू करेगी। इसमें शामिल होंगे, मातृत्व, शक्ति, नैपुण्यम, क्षेम और संजीवनी। इसके तहत महिलाओं की मदद के लिए ‘मातृत्व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे, जहां आईवीएफ (IVF) जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा सरकारसिजेरियन डिलीवरी को कम करने के लिए भी कदम उठाएगी।
सरकार कई नई सुविधाएं शुरू करने की भी योजना बना रही है, जैसे- हर 50 बच्चों पर एक चाइल्ड केयर सेंटर। सार्वजनिक स्थानों पर पिंक टॉयलेट। विशाखापत्तनम में 172 करोड़ रुपये की लागत से कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ा हॉस्टल।
नई नीति के तहत सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर विशेष प्रोत्साहन देगी। मुख्य सुविधाएं तीसरे बच्चे के जन्म पर 25,000 रुपए की आर्थिक सहायता। बच्चे को 5 साल तक हर महीने 1,000 रुपए। 18 साल की उम्र तक मुफ्त शिक्षा। मां को 12 महीने का मातृत्व अवकाश। पिता को 2 महीने का पितृत्व अवकाश। इसके अलावा हर चौथे शनिवार को जनसंख्या जागरूकता से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राज्य की गठबंधन सरकार ने पहले ही नियमों में बदलाव करते हुए दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को भी स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है।इसके अलावा ‘तल्लीकी वंदनम’ योजना में भी बच्चों की संख्या की सीमा हटा दी गई है, ताकि परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य भविष्य में संभावित जनसांख्यिकीय संकट से राज्य को बचाना और आर्थिक विकास को मजबूत करना है।
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