Ahmedabad Air India Plane Crash 1 Year: आज 12 जून 2025 को गुजरात में हुए Air India की फ्लाइट AI-171 का भयावह विमान हादसे को एक साल पूरे हो गये हैं। लेकिन आज भी इस हादसे में अपने को खोय हुए लोगों की यादें ताजा हैं। कोई आज भी बेटे के लौट आने की उम्मीद में दरवाजे की ओर देखता है, तो कोई अपने बच्चे की आखिरी यादों को सीने से लगाए बैठा है। इस त्रासदी ने सिर्फ विमान में सवार यात्रियों की जान नहीं ली, बल्कि जमीन पर मौजूद कई निर्दोष लोगों के सपनों को भी हमेशा के लिए चकनाचूर कर दिया।

12 जून 2025 को एयर इंडिया का एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान लंदन (गैटविक एयरपोर्ट) के लिए अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भर रहा था। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद यह विमान हादसे का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। विमान एक मेडिकल कॉलेज परिसर में गिरा, जिससे भारी तबाही हुई। इस हादसे को भारत के सबसे बड़े और दर्दनाक हवाई हादसों में से एक माना जाता है।
जान-माल का हुआ भारी नुकसान
इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई। जमीन पर मौजूद 19 लोग भी इस हादसे में मारे गए। केवल एक यात्री जीवित बचा, जिनका नाम विश्वास कुमार रमेश है (ब्रिटिश भारतीय नागरिक) हैं।
विमान के साथ क्या हुआ?
यह विमान बोइंग 787 ड्रीमलाइनर था, जो टेक-ऑफ के सिर्फ 32 सेकंड बाद ही क्रैश हो गया। उड़ान के तुरंत बाद विमान तेजी से नीचे गिरने लगा और एयरपोर्ट के पास ही इमारतों से टकराकर मेडिकल कॉलेज परिसर में गिर गया।
हादसे की जांच में अब तक किया सामने आया
जांच एजेंसियों ने हादसे की जांच शुरू की और जुलाई 2025 में शुरुआती रिपोर्ट सामने आई। जांच में कुछ अहम बातें सामने आईं। जैसे टेक-ऑफ के बाद कॉकपिट में दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच “RUN” से “CUTOFF” पर चले गए। इससे दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई तुरंत बंद हो गई। इंजन को मिलने वाला ईंधन रुकने से विमान का थ्रस्ट खत्म हो गया। विमान तेजी से नीचे गिरने लगा।
पायलटों ने इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश की
रिपोर्ट के अनुसार बाद में फ्यूल स्विच दोबारा “RUN” पर किया गया। पायलटों ने इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश की। लेकिन तब तक विमान बहुत नीचे आ चुका था। संभलने के लिए पर्याप्त समय और ऊंचाई नहीं बची थी।
कॉकपिट रिकॉर्डिंग में क्या सामने आया?
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में पायलटों की बातचीत रिकॉर्ड हुई। उसमें एक पायलट दूसरे से पूछता है “तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?” दूसरा पायलट जवाब देता है “मैंने ऐसा नहीं किया।” कुछ ही पलों बाद विमान हादसे का शिकार हो गया।

तकनीकी खराबी या मानवीय गलती?
अब तक की जांच में यह साफ नहीं हो पाया है कि हादसा क्यों हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार फ्यूल कंट्रोल स्विच को गलती से हिलाना आसान नहीं होता। इसमें लॉकिंग सिस्टम होता है, जो गलत मूवमेंट रोकता है। दोनों स्विच एक साथ बदलना आमतौर पर जानबूझकर कार्रवाई मानी जाती है।
जांच अब भी जारी
जांच एजेंसियों ने किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है। Boeing 787 सिस्टम या इंजन में कोई बड़ी खराबी नहीं मिली है। GE एयरोस्पेस इंजन की गहन जांच अभी भी चल रही है। फरवरी 2026 में जांच एजेंसी ने कहा कि अभी किसी नतीजे पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन स्विचों को किसने बदला? क्या किसी पायलट ने जानबूझकर ऐसा किया? क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी? या फिर कॉकपिट में ऐसा कुछ हुआ, जिसने अनुभवी पायलटों को भ्रमित कर दिया? एक साल बाद भी इन सवालों का कोई अंतिम जवाब नहीं आया है।
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