Site icon Dainik Savera Times

चानौत जल आंदोलन में पहुंचे 7 कांग्रेसी विधायक, बोले 32 विधायक भी साथ

7 Congress MLAs reached the Chanaut

7 Congress MLAs reached the Chanaut

7 Congress MLAs reached the Chanaut : हांसी। चानौत गांव में पेयजल संकट को लेकर पिछले 57 दिनों से जारी ग्रामीणों का आंदोलन अब राजनीतिक समर्थन भी हासिल करने लगा है। शनिवार को कांग्रेस विधायक दल ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल सहित सात कांग्रेस विधायकों ने ग्रामीणों की मांग को उचित बताते हुए सरकार से जल्द स्थायी समाधान निकालने और गांव में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

इन नेताओं ने दर्ज कराई उपस्थिति

धरना स्थल पर पहुंचे नेताओं में पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, कलानौर विधायक शकुंतला खटक, नारनौंद विधायक जस्सी पेटवाड़, गुहला-चीका विधायक हंसराज, उकलाना विधायक नरेश सेलवाल, महम विधायक बलराम दांगी और बरोदा विधायक इंदुराज नरवाल उर्फ भालू शामिल रहे। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि गांव चानौत को जल्द टी से पेयजल उपलब्ध कराया जाए। यदि इसके लिए कानून में बदलाव की आवश्यकता पड़ती है तो विशेष सत्र बुलाया जाए और कांग्रेस के सभी 32 विधायक इसके समर्थन के लिए तैयार हैं। पेयजल प्रत्येक नागरिक का मूलभूत अधिकार है और सरकार को इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

पेयजल सरकार की पहली जिम्मेदारी : भुक्कल

पूर्व मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि यदि ग्रामीणों को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए दो महीने तक धरने पर बैठना पड़े तो यह सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकार को तुरंत गांव की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। पानी की कमी का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी उचित नहीं है।

कांग्रेस हमें उनके साथ : नरवाल

बरोदा विधायक इंदुराज नरवाल उर्फ भालू ने कहा कि कांग्रेस हमेशा जनता के मुद्दों के साथ खड़ी रही है। यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की बात सुनना लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है। विधायकों ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में पेयजल संकट बना है और सरकार को स्थायी जल प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए। जनता की मूलभूत आवश्यकताओं की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। सरकार को बिना विलंब ग्रामीणों की मांग पूरी करनी चाहिए।

Also Read :

Exit mobile version