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Nepal flood tragedy: कैलाश यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 80 लोग लापता, सद्गुरु ने मांगी घटनास्थल जाने की अनुमति

80 people Isha Foundation Kailash Yatra go missing

80 people Isha Foundation Kailash Yatra go missing

नई दिल्ली: तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ पर आध्यात्मिक गुरु व ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जताते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर तबाही हुई है, उसे देखते हुए अभी नुकसान का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन से जुड़ा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक समूह बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें 80 लोग शामिल थे।

सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद हैं और रास्ते भी बाधित हैं। ऐसे में प्रभावित इलाके में संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव के काम में मदद की जा सके।

‘ग्रुप में शामिल 80 लोग किन देशों से थे’

सद्गुरु ने बताया, “हमारे ग्रुप में से एक एस3 ग्रुप जिससे हम सागर में मिले थे और फिर दोबारा तब मिले जब हम ऊपर ट्रेकिंग कर रहे थे और वे नीचे आ रहे थे। इस ग्रुप में 80 लोग शामिल थे जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं थीं। इनमें से 22 लोग अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति ग्रुप में शामिल था।

 

‘करीब 9:14 बजे भयावह आपदा आई, सदस्यों से संपर्क टूटा’

सद्गुरु ने बताया कि समूह जब वापसी के दौरान इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक सब कुछ सामान्य था। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर बताया था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद करीब 9:14 बजे अचानक यह भयावह आपदा आई। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। सद्गुरु ने कहा कि उनके नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हुए, जिससे चिंता और बढ़ गई। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक हिस्सा तक पानी और मलबे में बह गया। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ स्वयंसेवक और एक डॉक्टर भी मौजूद थे। कई नेपाली गाइड भी यात्रा दल के साथ थे और उनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ तीर्थयात्रियों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। सद्गुरु ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है जबकि तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।

मृतकों की संख्या 160 से अधिक

ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है। शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था। हालांकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिले कि आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से का खिसकना या ग्लेशियर से जुड़ी घटना हो सकती है। इसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा और देखते ही देखते तेज फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी।पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं। राहत एवं बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है।

सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की

सद्गुरु ने कहा कि इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है और प्रभावित परिवारों तक भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी काम है कि किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाए और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए।

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