
इंटरनेशनल डेस्क: 19 अक्टूबर को मुंबई स्थित चीनी महावाणिज्य दूतावास और भारत-चीन मैत्री संघ की कर्नाटक शाखा ने चीनी जनता के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बेंगलुरु में संयुक्त रूप से एक फोटो प्रदर्शनी आयोजित की। मुंबई में चीनी महावाणिज्य दूत छिन च्ये ने मुख्य भाषण दिया और भारत-चीन मैत्री संघ के राष्ट्रीय मानद अध्यक्ष सिंधिया और भारत-चीन मैत्री संघ की कर्नाटक शाखा के महासचिव बसकरन ने भी भाषण दिए। कर्नाटक शाखा के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 70 लोगों ने प्रदर्शनी में भाग लिया।
महावाणिज्य दूत छिन च्ये ने कहा कि इस वर्ष चीनी जनता के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ और चीन-भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है। चीनी जनता के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और चीनी जनता ने भारी बलिदान देकर विश्व शांति की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
उन्होंने कहा कि भारतीय डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस ने चीन की राष्ट्रीय मुक्ति के लिए अपना बहुमूल्य जीवन बलिदान दिया और चीन-भारत मैत्री के स्मारक बन गए। मानव जाति का भाग्य आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। मानव जाति एक साझा भविष्य वाला समुदाय है, जो सुख-दुख दोनों को साझा करता है और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित वैश्विक शासन पहल ने विश्व शांति और विकास में बहुमूल्य सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।
उधर, सिंधिया और बसकरन ने अपने-अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वतंत्रता और विकास में चीन और भारत के संयुक्त सहयोग के इतिहास की समीक्षा की और भारत के सभी क्षेत्रों से चीन के बारे में सही और वस्तुनिष्ठ समझ रखने तथा विभिन्न क्षेत्रों में चीन के साथ सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। बताया गया कि उस दिन, छिन च्ये ने “टाइम्स ऑफ इंडिया” को भी एक साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने चीन-भारत सहयोग पर सवालों के जवाब दिए।
छिन च्ये ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में चीन और भारत ने हाल ही में द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर गर्मजोशी को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक उपाय शुरू किए हैं। भारत ने चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा स्वीकार करना फिर से शुरू कर दिया है। चीन और भारत के बीच सीधी उड़ानें जल्द ही शुरू होने वाली हैं। अब तक, मुंबई में चीनी महावाणिज्य दूतावास ने 80,000 से ज़्यादा वीज़ा जारी किए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि चीन और भारत में कई समानताएँ हैं – एक लंबा इतिहास, मिलनसार लोग, विशाल जनसंख्या और बाज़ार। इसके साथ ही दोनों देश विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में हैं। चीन और भारत को सहयोग को मज़बूत करने के साथ-साथ पारस्परिक सफलता प्राप्त करते हुए अपने-अपने लोगों को लाभान्वित करना चाहिए। साथ ही उन्हें विकासशील देशों की भलाई की रक्षा करने, बहुपक्षवाद का पालन करने और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करना आवश्यक है।
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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