नई दिल्ली : राजधानी में रविवार को ‘सिटिजन्स मार्च’ के दौरान इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन की कोशिश को लेकर माहौल तनावपूर्ण रहा। आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े लोग मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के जंतर-मंतर की ओर बढ़ने के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे जाने से रोका।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वामपंथी छात्र संगठन आइसा की नेता नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया। आइसा ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि नेहा बोरा को जिस वाहन में ले जाया गया, उसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन ने उन्हें कहां ले जाया गया, इसकी जानकारी नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया।
योगेंद्र यादव ने भी नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे गैरकानूनी बताया। बाद में उन्होंने जानकारी दी कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी के कारण पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी। बैरिकेडिंग के चलते मार्च में शामिल लोगों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तनातनी की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। उनका आरोप था कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण मार्च करने से उन्हें रोका गया। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की ओर से जंतर-मंतर की ओर जाने वाले मार्गों पर आवाजाही नियंत्रित की गई। प्रदर्शन और हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर देर शाम तक विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।
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