नई दिल्ली : सरकार ने कहा है कि उसके समन्वित संरक्षण प्रयासों को मिली एक बड़ी सफलता के तहत करीब 10 साल बाद अत्यंत संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का गुजरात के कच्छ क्षेत्र में चूजा निकला है। यह उपलब्धि 2024 में बनी उसकी विशेष त्वरित आरंभ पद्धति के कारण संभव हुई है। पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में कहा कि इस पहल के तहत राजस्थान से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानि तिलोर पक्षी के अंडों को सावधानीपूर्वक गुजरात लाया गया और वैज्ञानिक विधि से उनका ऊष्मायन किया गया।
उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया भारतीय वन्य जीव संस्थान राजस्थान और गुजरात के वन विभाग तथा उनके मंत्रालय के समन्वित सहयोग से संभव हो सकी है। उन्होंने बताया कि संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम के तहत अब ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी तिलोर पक्षी की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। यह संख्या इस अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सरकार का लक्ष्य इन पक्षियों की संख्या बढ़ाकर इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तिलोर विश्व की सबसे दुर्लभ उड़ने वाली पक्षी प्रजातियों में से एक है और भारत में इसकी संख्या लंबे समय से घटती रही है। इसके संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने विशेष प्रजनन केंद्र स्थापित किए हैं, जिनमें राजस्थान का डैजर्ट नैशनल पार्क और गुजरात का कच्छ क्षेत्र शामिल हैं।
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