नेशनल डेस्कः देश में बैंकिंग से जुड़ी साइबर सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अब साइबर अपराधियों के निशाने पर सिर्फ लोगों के बैंक खाते और जमा पैसा ही नहीं, बल्कि उनकी निजी जानकारी भी है। पहले देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के हजारों ग्राहकों की जानकारी डार्क वेब पर सामने आने की खबर आई थी। अब AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के ग्राहकों का डेटा भी लीक होने की आशंका जताई जा रही है।
एक हैकर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के सिस्टम में सेंध लगाकर ग्राहकों और बैंक के आंतरिक कामकाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की हैं। इस दावे के सामने आने के बाद बैंक ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, बैंक का कहना है कि उसके मुख्य बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं और इस घटना का बैंकिंग सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि वह संभावित डेटा लीक के मामले की जांच कर रहा है। बैंक के मुताबिक, यह मामला सेल्सफोर्स (Salesforce) पर होस्ट किए गए एक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ है।
इस प्लेटफॉर्म पर वाहन लोन यानी गाड़ी खरीदने के लिए कर्ज लेने वाले ग्राहकों की कुछ सीमित जानकारी रखी जाती है। बैंक ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का संचालन और होस्टिंग सेल्सफोर्स की ओर से की जाती है।
बैंक ने यह भी साफ किया है कि उसके अपने बैंकिंग सिस्टम पर इस घटना का कोई असर नहीं पड़ा है। बैंक के अनुसार, ग्राहकों के पैसे और सामान्य बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह चल रही हैं। फिलहाल बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर इस प्लेटफॉर्म से कौन-सी जानकारी बाहर गई है और इस घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है।
हैकर ग्रुप ने ग्राहकों की कौन-कौन सी जानकारी चुराने का किया दावा?
रिपोर्ट के मुताबिक, स्कार्लेटग्रुप (ScarletGroup) नाम के एक हैकर ग्रुप ने AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के सिस्टम में सेंध लगाने का दावा किया है। हैकर ग्रुप का कहना है कि उसके पास बैंक के ग्राहकों और कर्मचारियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मौजूद है। इसमें कई तरह के निजी और वित्तीय दस्तावेज शामिल होने का दावा किया गया है।
हैकर ग्रुप के दावे के मुताबिक, उसके हाथ ग्राहकों के ये दस्तावेज और जानकारियां लगी हैं।
-ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड और पहचान से जुड़े दस्तावेज।
-पैन कार्ड और आधार कार्ड से संबंधित जानकारी।
-ग्राहकों की क्रेडिट रिपोर्ट।
-बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारी।
-वाहन लोन के लिए किए गए आवेदन।
-ग्राहकों के हस्ताक्षर वाले लोन एग्रीमेंट।
-बीमा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज।
-बैंक के CRM सिस्टम में मौजूद ग्राहकों की जानकारी।
इसके अलावा हैकर ग्रुप ने बैंक के कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी, लॉगिन हिस्ट्री और सिस्टम में होने वाली गतिविधियों के रिकॉर्ड हासिल करने का भी दावा किया है। हालांकि, अभी तक इन सभी जानकारियों के चोरी होने की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बैंक की ओर से भी जांच जारी है। इसलिए फिलहाल हैकर ग्रुप के दावों को पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।
इससे पहले SBI के 3,897 ग्राहकों की जानकारी हुई थी उजागर
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में डेटा लीक की आशंका ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले ही भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर उजागर होने का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, SBI के 3,897 ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी डार्क वेब पर उपलब्ध होने की बात सामने आई थी। इस जानकारी में ग्राहकों के मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल आईडी और घर के पते जैसी निजी जानकारियां शामिल थीं।
SBI ने 21 अक्टूबर को साइबर सुरक्षा से जुड़ी इस घटना की पुष्टि की थी। बैंक को इस मामले की जानकारी थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) की ओर से मिले अलर्ट के जरिए हुई थी। इस घटना के बाद बैंकिंग सेक्टर में ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़ा मामला सामने आने के बाद एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा चर्चा में है।

