Last Updated: November 2, 2026

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रक्षा मंत्रालय और BEL के बीच समझौता, 1950 करोड़ रुपये में हुई डील

April 2, 2026

रक्षा मंत्रालय और BEL के बीच समझौता, 1950 करोड़ रुपये में हुई डील

नेशनल डेस्क: भारत की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ करीब 1950 करोड़ रुपये का बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना के लिए दो अत्याधुनिक माउंटेन रडार खरीदे जाएंगे। इस डील में सिर्फ रडार ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े सभी जरूरी उपकरण और बुनियादी ढांचा भी शामिल है।

यह सौदा Buy (Indian–IDDM) श्रेणी के तहत किया गया है, जो रक्षा खरीद की सबसे उच्च प्राथमिकता वाली कैटेगरी मानी जाती है। इसका मकसद देश में ही रक्षा उपकरणों का निर्माण बढ़ाना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। सरकार लगातार आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ा रही है और यह समझौता उसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

इन माउंटेन रडार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की लैब LRDE ने डिजाइन और विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं। इनका निर्माण, असेंबली और सप्लाई भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा की जाएगी। ये रडार आधुनिक होने के साथ-साथ कॉम्पैक्ट भी हैं, यानी इन्हें आसानी से अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जा सकता है।

अगर इसकी क्षमताओं की बात करें तो ये रडार दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। खास बात यह है कि ये हिमालय जैसे कठिन और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी बेहद प्रभावी हैं। कम ऊंचाई पर उड़ने वाले क्रूज मिसाइल और ड्रोन का पता लगाने में भी ये सक्षम हैं, जो आमतौर पर पकड़ में आना मुश्किल होता है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये रडार लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफी कारगर साबित होंगे। इन्हें चिनूक जैसे भारी-भरकम हेलीकॉप्टर की मदद से ऊंचे पहाड़ों या दुर्गम इलाकों में आसानी से पहुंचाकर तैनात किया जा सकता है।

ये रडार हर मौसम में काम करने में सक्षम हैं और लगातार हवाई निगरानी बनाए रखते हैं। इससे दुश्मन की किसी भी गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। इनकी तैनाती से भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी और देश की एयर डिफेंस प्रणाली पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

यह सौदा न केवल देश की सुरक्षा को नई मजबूती देगा, बल्कि स्वदेशी तकनीक और रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। DRDO और BEL का यह सहयोग भविष्य में भी ऐसे कई रक्षा प्रोजेक्ट्स के लिए एक उदाहरण बन सकता है। खासतौर पर चीन और पाकिस्तान से लगे पहाड़ी इलाकों में इन रडारों की तैनाती से देश की हवाई सुरक्षा और ज्यादा मजबूत और चौकस हो जाएगी।

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