Site icon Dainik Savera Times

मध्य पूर्व के बड़े हिस्से में उड़ान भरने से बच रही एयरलाइंस, लागत में हो रहा इजाफा

नई दिल्ली : अमरीका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद से मध्य पूर्व में हवाई यातायात को चुनौतियों का समाना करना पड़ा है। बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण एयरलाइंस अब इस क्षेत्र के हवाई क्षेत्र के बड़े हिस्से से उड़ान भरने से बच रही हैं, जिसके कारण उड़ानों में देरी हो रही है, उड़ान का समय बढ़ रहा है और लागत बढ़ रही है। फ्लाइट ट्रैकिंग सर्विस फ्लाइटरडार24 के अनुसार, कमर्शियल विमान ईरान, इराक, सीरिया और इसराइल जैसे देशों पर से उड़ान भरने से बच रहे हैं और अपना मार्ग परिवर्तित कर रहे हैं। इसके बजाय, वे कैस्पियन सागर, मिस्र या सऊदी अरब जैसे सुरक्षित क्षेत्रों से होकर लम्बे रास्ते अपना रहे हैं। इस बदलाव के कारण ईंधन की खपत बढ़ रही है और उड़ान संचालन महंगा हो रहा है।

फ्लाइटरडार24 के द्वारा सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया, ‘अमरीकी हमलों के बाद कमर्शयिल विमान उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में उड़ान भरने से बच रहे हैं, पिछले सप्ताह लागू किए गए हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों का पालन कर रहे हैं। मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं। एविएशन रिस्क मॉनिटरिंग ग्रुप सेफ एयरस्पेस ने चेतावनी दी है कि अमरीकी हमलों से मध्य पूर्व के पास उड़ान भरने वाली अमरीकी एयरलाइनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि अभी तक नागरिक विमानों को कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन समूह ने कहा कि ईरान अमरीकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर या हिजबुल्लाह जैसे अपने सहयोगियों का इस्तेमाल करके जवाब दे सकता है। सेफ एयरस्पेस ने यह भी चेतावनी दी है कि बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे अन्य खाड़ी देशों को भी खतरा बढ़ सकता है।

ये भी पढ़ें- ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, 2030 तक भारत बने ग्लोबल हब: राजनाथ सिंह

Exit mobile version