नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता अजित पवार को 5 बार उप मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। इसके साथ ही अजित पवार महाराष्ट्र के ऐसे नेता बन गए, जिन्होंने सबसे लंबे समय तक उप मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाया। फिलहाल वह देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे। दिसंबर 2024 से वह महाराष्ट्र के आठवें उप मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
अजित पवार का उप मुख्यमंत्री कार्यकाल
अजित पवार अब तक कई बार इस पद पर रह चुके हैं…
नवंबर 2010 से सितंबर 2012 तक (मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण)
अक्टूबर 2012 से सितंबर 2014 तक (मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण)
नवंबर 2019 में कुछ दिनों के लिए (मुख्यमंत्री: देवेंद्र फडणवीस)
दिसंबर 2019 से जून 2022 तक (मुख्यमंत्री: उद्धव ठाकरे)
जुलाई 2023 से वर्तमान तक (मुख्यमंत्री: एकनाथ शिंदे / देवेंद्र फडणवीस सरकार)
कौन हैं अजित पवार?
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ था। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार के भतीजे थे। उनके पिता अनंतराव पवार फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे और प्रसिद्ध फिल्मकार वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से प्रेरणा लेकर राजनीति में कदम रखा। समर्थकों के बीच वह ‘दादा’ नाम से काफी लोकप्रिय थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई देओली प्रवर में हुई और उन्होंने माध्यमिक स्तर तक शिक्षा हासिल की।
राजनीति में एंट्री और शुरुआती सफर
अजित पवार ने महज 20 साल की उम्र में राजनीति की शुरुआत की। साल 1982 में उन्होंने एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़कर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। 1991 में वह पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 वर्षों तक इस पद पर रहे। इसी साल वह बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद में यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी। इसके बाद वह महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने। 1992-93 में उन्होंने कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
विधानसभा चुनावों में लगातार जीत
अजित पवार ने बारामती विधानसभा सीट से कई बार जीत दर्ज की। वह 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 के विधानसभा चुनावों में लगातार विजयी रहे। अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं का काम देखा।
सत्ता तक पहुंचने की कहानी
2009 के विधानसभा चुनाव के बाद अजित पवार उप मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन उस समय यह पद उन्हें नहीं मिला। इसके बाद दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। साल 2013 में उनका नाम सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े एक विवाद में आया, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई और वह फिर से सरकार में लौट आए।
विवादों से भी रहा नाता
अजित पवार का राजनीतिक जीवन कई विवादों में भी घिरा रहा। 2013 में बांधों को लेकर दिए गए एक बयान पर उनकी काफी आलोचना हुई, जिसके बाद उन्होंने माफी मांगी। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन पर मतदाताओं को धमकाने के आरोप लगे। इसके अलावा भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे। लवासा लेक सिटी परियोजना को लेकर भी उनका नाम विवादों में रहा। हालांकि इन सबके बावजूद अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता बने रहे।