All party meeting : भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्वदलीय बैठकों में शामिल होने को लेकर बार-बार झूठ फैला रही है। अमित मालवीय ने तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि यूपीए सरकार के दौरान न तो तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और न ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कभी ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया।
संसदीय कार्य मंत्री द्वारा की गई सभी मीटिंग
मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कांग्रेस एक बार फिर बेनकाब हो गई है। वह प्रधानमंत्री के सर्वदलीय बैठकों में शामिल होने को लेकर खुलेआम झूठ बोल रही है।” उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान संसद के सुचारू संचालन के लिए सदन के नेताओं की सर्वदलीय बैठकें होती थीं, लेकिन 13 अगस्त 2013 को हुई पहली बैठक से लेकर फरवरी 2014 तक, सभी बैठकें केवल संसदीय कार्य मंत्री द्वारा ही की गईं। इन बैठकों में प्रधानमंत्री या सोनिया गांधी की कोई उपस्थिति नहीं थी।
कांग्रेस एक बार फिर बेनकाब हो गई — प्रधानमंत्री की सर्वदलीय बैठकों में भागीदारी को लेकर सफेद झूठ बोला गया।
आइए तथ्यों पर नज़र डालें 👇
यूपीए सरकार के दौरान, संसद के सुचारू संचालन के लिए आयोजित एक भी सर्वदलीय फ्लोर लीडर्स मीटिंग में उस समय के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह या…
— Amit Malviya (@amitmalviya) July 20, 2025
PM ने खुद बैठकों में भाग लेना शुरू किया
इसके विपरीत, मालवीय ने दावा किया कि एनडीए सरकार में, जुलाई 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं ऐसी बैठकों में भाग लेना शुरू कर दिया था, जो ज़िम्मेदारी और संवाद का एक नया मानक था। उन्होंने कहा कि 2014 से 2021 तक प्रधानमंत्री मोदी संसद के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से इन बैठकों में शामिल होते रहे। मालवीय ने यह भी स्पष्ट किया कि 2021 के बाद, रक्षा और संसदीय कार्य मंत्रियों द्वारा यह परंपरा जारी रखी गई, जैसा कि यूपीए काल में भी प्रचलित था।
डॉ. मनमोहन सिंह या सोनिया गांधी क्यों नहीं हुए शामिल
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया, “कांग्रेस को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि डॉ. मनमोहन सिंह या सोनिया गांधी 10 सालों में एक भी सर्वदलीय बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए?” अमित मालवीय ने अपने पोस्ट के अंत में कांग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा, “यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के पास न तो स्मृति है, न स्थिरता है और न ही कोई विश्वसनीयता है।”

