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Dehradun में नस्लीय हिंसा: त्रिपुरा के MBA छात्र की चाकू से हत्या, 17 दिन तक चला इलाज

tripura student murder

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नेशनल डेस्क: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नस्लीय टिप्पणी और नशे में की गई हिंसा ने एक होनहार छात्र की जान ले ली। त्रिपुरा निवासी एमबीए छात्र एंजेल चकमा पर कुछ युवकों ने चाकू से हमला किया था। गंभीर रूप से घायल एंजेल ने 17 दिनों तक आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

9 दिसंबर की शाम हुई घटना

यह घटना 9 दिसंबर 2025 को देहरादून के सेलाकुई इलाके में शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच हुई। एंजेल चकमा जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में एमबीए फाइनल ईयर का छात्र था। वह अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ बाजार में खरीदारी के लिए गया था। उसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और दोनों भाइयों के रंग-रूप को लेकर आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियां करने लगे।

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पीड़ित परिवार के अनुसार, हमलावरों ने नेपाली, चाइनीज, चिंकी और मोमोज जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जब एंजेल और उसके भाई माइकल ने इसका विरोध किया, तो आरोपी और आक्रामक हो गए। शराब के नशे में धुत युवकों ने पहले दोनों भाइयों के साथ मारपीट शुरू कर दी। माइकल चकमा के सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया गया, जिससे वह घायल हो गया। इसके बाद आरोपियों ने एंजेल चकमा पर चाकुओं से हमला कर दिया। उसकी गर्दन और पेट में कई बार चाकू घोंपे गए। गंभीर रूप से घायल एंजेल सड़क पर गिर पड़ा। जाते-जाते हमलावरों ने दोनों भाइयों को जान से मारने की धमकी भी दी।

17 दिन तक आईसीयू में चला इलाज

घटना के तुरंत बाद एंजेल को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे आईसीयू में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। करीब 17 दिनों तक चले इलाज के बाद आखिरकार एंजेल चकमा ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर से परिवार, विश्वविद्यालय और छात्र समुदाय में शोक की लहर फैल गई।

पुलिस की कार्रवाई

सेलाकुई थाना पुलिस ने मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में एक छात्र मणिपुर का रहने वाला भी है। हालांकि, इस हिंसक घटना का मुख्य आरोपी अभी तक फरार है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार लगी हुई है।

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बाहर से पढ़ने आए छात्रों में बढ़ी चिंता

यह घटना देश के अलग-अलग राज्यों से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय स्तर पर छात्रों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को नस्लीय हिंसा बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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