कुलगाम (जम्मू-कश्मीर): दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा चलाया जा रहा आतंकवाद विरोधी अभियान तीसरे दिन भी जारी है। इस ऑपरेशन को वर्ष 2025 का सबसे बड़ा एंटी-टेरर मिशन माना जा रहा है। अब तक की कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है, जबकि एक जवान के घायल होने की भी खबर है।
भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। हाईटेक ड्रोन, सर्विलांस सिस्टम और स्पेशल पैरा कमांडोज़ की मदद से आतंकियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सेना की 15वीं कोर के कमांडर और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी व्यक्तिगत रूप से इस ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन
1 अगस्त को खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने अखल के घने वन क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद यह ऑपरेशन मुठभेड़ में तब्दील हो गया। सेना ने इलाके को चारों तरफ से घेरकर जवाबी कार्रवाई की, जो अब तक जारी है।
तीन दिन की जबरदस्त मुठभेड़
इस भीषण मुठभेड़ में जंगलों के भीतर कई बार विस्फोट और भारी गोलीबारी हुई है। सेना के सूत्रों के अनुसार, मारे गए तीनों आतंकियों की पहचान जल्द सार्वजनिक की जा सकती है। यह भी आशंका है कि इलाके में कुछ और आतंकी छिपे हो सकते हैं, जिसके चलते सर्च ऑपरेशन अभी भी रुक-रुक कर जारी है।
हफ्ते भर में तीसरा बड़ा एनकाउंटर
पिछले एक सप्ताह में यह जम्मू-कश्मीर में तीसरी बड़ी मुठभेड़ है। हाल ही में, पहलगाम के पास ऑपरेशन महादेव के तहत तीन आतंकियों – सुलेमान, अफगान और जिब्रान को ढेर किया गया था। ये सभी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी आतंकी थे, जो अप्रैल में बैसरन घाटी में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे। इसके अलावा, 31 जुलाई को पुंछ में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास दो घुसपैठिए आतंकवादी मारे गए थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी
गृह मंत्रालय के अधिकारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दफ्तर से भी ऑपरेशन पर नजर रखी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में संसद में कहा था कि आतंकी गतिविधियों को जड़ से खत्म करने के लिए सुरक्षाबलों को हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है।