Last Updated: October 10, 2026

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अंबुबाची मेला 2025: 4 दिनों के बाद खुले कामाख्या देवी मंदिर के दरवाजे; बेहद खास है यहां का प्रसाद, जानें मेले की खास बातें

June 27, 2025

अंबुबाची मेला 2025: 4 दिनों के बाद खुले कामाख्या देवी मंदिर के दरवाजे; बेहद खास है यहां का प्रसाद, जानें मेले की खास बातें

गुवाहाटी: अधिकारियों ने बताया कि नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर के दरवाजे चार दिनों के ‘अंबुबाची मेले’ के बाद गुरुवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। यह मेला हर साल चार दिनों के लिए आयोजित किया जाता है जब मंदिर के दरवाजे बंद होते हैं, जो देवी कामाख्या के मासिक धर्म के अनुष्ठान के साथ मेल खाता है। रविवार से मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।

एक अधिकारी ने बताया, “मंदिर में पूजा-अर्चना ‘प्रभुति’ से रोक दी गई थी और आज सुबह ‘प्रभुति’ के बाद मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए।”

कामरूप मेट्रोपोलिटन जिले के एक अधिकारी ने बताया कि प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में वार्षिक अम्बुबाची मेला 22 जून को कड़ी सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के बीच शुरू हुआ, जिसमें कई लाख पर्यटक शामिल हुए।

इस अवसर पर टिप्पणी करते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा: “चूंकि निबर्ति में भक्तों के लिए मां कामाख्या के द्वार खुल रहे हैं, जो 4 दिवसीय #अंबुबाची महायोग के पूरा होने का प्रतीक है, मैं भारत के कल्याण के लिए मां कामाख्या से प्रार्थना करता हूं।” उन्होंने कहा, “मां कामाख्या सभी को समृद्धि का आशीर्वाद दें और सभ्यता को आगे बढ़ाएं। जय मां कामाख्या।”

अम्बुबाची मेले के दौरान कामाख्या मंदिर में किसी भी वीआईपी या वीवीआईपी की आवाजाही की अनुमति नहीं थी और 23 जून से आगंतुकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

64 योगिनियों की होती है साधना
अंबुबाची मेला के दौरान कामाख्या मंदिर का मुख्य गर्भगृह तीन दिन के लिए बंद रहता है. इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में देवी के पास सफेद कपड़ा रखा जाता है, माता के रजस्वला होने के बाद यह कपड़ा लाल हो जाता है, जो भक्तों को प्रसाद के रूप में दे दिया जाता है. फिर चौथे दिन मां शुद्ध होकर भक्तों को दर्शन के लिए फिर से प्रकट होती हैं, जिसे महाभिषेक कहा जाता है. यहां योगिनी तंत्र के अनुसार 64 योगिनियों की साधना की जाती है. यह स्त्री-शरीर की प्रकृति के प्रति एक पवित्र स्वीकृति है. यह दुनिया में एकमात्र ऐसा धार्मिक पर्व है जो देवी के मासिक धर्म को दिव्यता प्रदान करता है. यहां आस्था, तंत्र, भक्ति और उर्वरता एक ही मंच पर मिलते हैं.

मिलता है यह प्रसाद
यहां प्रसाद के रूप में गर्भगृह से निकला हुआ जल (रजस्वला जल) और लाल कपड़ा (कामाख्या वस्त्र) दिया जाता है. राजस्वला प्रसाद को लेकर यहां के नियम बेहद कड़े हैं. हर किसी को यह प्रसाद नहीं मिलता है. माता का प्रसाद ज्यादातर जरूरतमंद भक्तों, संतानहीन महिलाओं और कुमारी कन्याओं के बीच बांटा जाता है. पर्यटकों और शोधार्थियों को इस समय मंदिर के भीतर प्रवेश की अनुमति न होना इस रहस्य को बनाए रखता है.

क्या है धार्मिक महत्व
अंबुबाची का मतलब होता है “जल से बोली गई”, ये नाम मॉनसून और देवी के मासिक धर्म, दोनों को दर्शाता है। इस त्योहार को कामाख्या देवी के सालाना मासिक धर्म चक्र के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत तांत्रिक परंपरा और मान्यताओं से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि जब भगवान शिव तांडव कर रहे थे, तब देवी सती की योनि (गर्भस्थान) यहीं गिरी थी। इसलिए ये जगह शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

मेला कितने दिन तक रहेगा और क्या हैं नियम
अंबुबाची मेला 2025 का आयोजन 22 जून से शुरू हो चुका है, जो 26 जून तक चलेगा। ये मेला 22 जून सुबह 8:43 बजे स्नान (पवित्र स्नान) और नित्य पूजा के साथ शुरू हो चुका है। इन दिनों के दौरान मंदिर सभी लोगों के लिए बंद रहता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ये दिन माता के रजस्वला काल यानी मासिक धर्म के हैं। ये समय देवी के विश्राम, शुद्धिकरण और उनके प्राकृतिक चक्र के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

25 जून की सुबह करीब 6 बजे मंदिर के दरवाजे फिर से खोले जाते हैं, जो कि दर्शाता है कि माता का रजस्वला काल समाप्त हो गया है और पूजा-पाठ फिर से शुरू हो सकती है। इस दिन मंदिर की साफ-सफाई की जाती है और भक्तों को दोबारा दर्शन की अनुमति मिलती है। इसके बाद भक्त माता के दर्शन करते हैं।

 

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