Assembly Elections 2026: 2026 भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साल साबित होने वाला है। बता दें कि अगले कुछ महीनों में असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव सिर्फ राज्य स्तर की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेंगे। भाजपा अपने विस्तार के लक्ष्य के साथ इन राज्यों में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस और क्षेत्रीय दल भाजपा को कोई अवसर न देने के लिए सक्रिय हैं।
आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, राजनीतिक माहौल और आगामी चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं।
1. पश्चिम बंगाल: ममता के सामने चुनौती बड़ी
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार है। 2021 में TMC ने 213 सीटों पर जीत दर्ज की थी और 48% वोट शेयर हासिल किया था। ममता की लोकप्रियता और उनके कल्याणकारी कार्यक्रम उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। लेकिन राज्य में बढ़ती आर्थिक चुनौतियाँ और प्रशासनिक विवाद उनकी सरकार के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं।
बीजेपी ने 2021 में 77 सीटों तक पहुंच बनाई थी और अब पार्टी बिहार में हाल ही में मिली सफलता के बाद बंगाल में और आक्रामक हो सकती है। कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और नेतृत्व की कमी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। इस चुनाव का नतीजा बंगाल में TMC और BJP की भविष्य की रणनीति तय कर सकता है।
2. असम: बीजेपी की मजबूत पकड़
असम में हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में भाजपा गठबंधन की सरकार है। 2021 में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी और अब तीसरी बार सत्ता में लौटने की तैयारी में है। हिमंत विश्व शर्मा ने विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी पकड़ मजबूत की है।
विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को तैयार है, वहीं मुस्लिम वोटों पर निर्भर AIUDF जैसी पार्टियों की भूमिका भी निर्णायक हो सकती है। असम का यह चुनाव BJP के लिए पूर्वोत्तर में अपनी सत्ता मजबूत करने का अवसर है।
3. तमिलनाडु: DMK के लिए एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर चुनौती
तमिलनाडु में एम. के. स्टालिन की DMK सरकार है। 2021 में पार्टी ने 234 में से 133 सीटें जीती थीं। राज्य में DMK की कल्याणकारी योजनाओं से लगभग 1.86 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं।
हालांकि बेरोजगारी और एंटी-इंकंबेंसी का दबाव DMK पर भारी पड़ सकता है। दूसरी तरफ AIADMK-बीजेपी गठबंधन और विजय की नई पार्टी TVK युवा वोटरों को लुभाने में जुटी है। यह चुनाव भाजपा के लिए दक्षिण में अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका भी है।
4. केरल: कांग्रेस की उम्मीदें फिर जागी
केरल में पिनाराई विजयन की LDF सरकार है, जिसने 2021 में 99 सीटें जीती थीं। हाल के महीनों में LDF के लिए माहौल कठिन रहा है। 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-UDF ने अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे LDF के लिए चुनौती बढ़ गई है। भाजपा भी पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश में है। इस चुनाव में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी सभी का राजनीतिक भविष्य दांव पर है।
5. पुडुचेरी: NDA के लिए आसान नहीं
पुडुचेरी में एन. रंगासामी की AINRC-बीजेपी गठबंधन की सरकार है। 2021 में AINRC ने 10 और बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं।
वर्तमान में गठबंधन के भीतर संतुलन थोड़ा चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। विपक्ष में DMK और कांग्रेस सक्रिय हैं और विकास और लोकल गवर्नेंस मुद्दे चुनाव की दिशा तय करेंगे। यह चुनाव भाजपा के लिए दक्षिण में गठबंधन बनाए रखने की परीक्षा साबित हो सकता है।
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बीजेपी के लिए सुनहरा अवसर
इन पांच राज्यों के चुनाव भाजपा के लिए दक्षिण और पूर्व में विस्तार का बड़ा अवसर हैं। मोदी सरकार की लोकप्रियता और हिंदुत्व की राजनीति पार्टी के लिए मजबूती का जरिया हैं। वहीं, विपक्ष के लिए यह एक मौका है अपनी स्थिति मजबूत करने और एंटी-इंकंबेंसी का लाभ उठाने का। इन चुनावों के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
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