मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा सार्वजनिक की गई 32 मिनट की वायरल ऑडियो क्लिप और उसमें किए गए 500 करोड़ के लेनदेन संबंधी आरोपों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच, साइबर विश्लेषण तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन जांच कर पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी। इसी उद्देश्य से तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है।
जांच के लिए गठित की गई एसआईटी में तीन अधिकारीयों को शामिल किया गया है, जिसमें शैलेश बलकवडे, अपर पुलिस आयुक्त, दक्षिण प्रादेशिक विभाग, मुंबई को अध्यक्ष बनाया गया है। इस जांच कमेटी में विजयकांत सागर (सदस्य) पुलिस उपायुक्त, दक्षिण परिमंडल-3, मुंबई और बजरंग बनसोडे (सदस्य) पुलिस उपायुक्त, साइबर, अपराध शाखा, मुंबई भी शामिल हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने एक ऑडियो क्लिप सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को बदनाम करने और उसे कमजोर करने की साजिश रची जा रही है।
ऑडियो क्लिप के एक हिस्से में यह दावा किया गया कि जरांगे को पहले ही 500 करोड़ रुपए पहुंच चुके हैं। बातचीत में यह भी कहा गया कि मुख्य व्यक्तिगत निशाना देवेंद्र फडणवीस और भाजपा है। इन दावों के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
वायरल ऑडियो क्लिप ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी। एक ओर विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा मामले की पारदर्शी जांच की मांग की। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का कहना है कि पूरे मामले के पीछे की सच्चाई सामने लाने के लिए तकनीकी और कानूनी स्तर पर विस्तृत जांच जरूरी है। अब एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वायरल ऑडियो क्लिप में किए गए दावे कितने सत्य हैं और इसके पीछे वास्तव में कौन लोग शामिल हैं।

