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5 जून से निजी अस्पतालों में आयुष्मान मरीजों का इलाज बंद

Private Hospitals Stop Treatment After June 5

Private Hospitals Stop Treatment After June 5

चंडीगढ़। प्रदेश में आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरियाणा ने कहा कि अगर सरकार ने अस्पतालों के बकाया भुगतान और दूसरी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया तो वे 5 जून की रात से इनका इलाज बंद कर देंगे।

नए मरीजों को नहीं करेंगे भर्ती

वे नए आयुष्मान मरीजों को भर्ती करना भी बंद करेंगे। आईएमए का दावा है कि सरकार ने पहले लंबित भुगतान जल्द जारी करने का भरोसा दिया था लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संगठन ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो कुछ अस्पताल योजना से बाहर होने पर भी विचार कर सकते हैं। आईएमए हरियाणा ने इस संबंध में आयुष्मान भारत हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी के सीईओ को पत्र भेजकर अपनी नाराजगी जताई है।

16 अप्रैल को भी हुई थी बैठक

पत्र में यह भी कहा है कि 16 अप्रैल को HHPA and IMA हरियाणा के पदाधिकारियों के बीच हुई ऑनलाइन बैठक में लंबित भुगतान और अन्य समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, मगर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आईएमए ने आरोप लगाया कि अस्पतालों की ओर से सभी जानकारियां अपडेट करने के बावजूद क्लेम भुगतान नहीं किए गए। टीएमएस-1 व टीएमएस-2 पोर्टल से जुड़े मामलों का निपटारा अब तक लंबित है और हाल ही में किए गए भुगतानों में भी कटौतियां की गई हैं।

5 मई तक था भुगतान का भरोसा

संगठन का कहना है कि 5 मई तक अधिकतर भुगतान जारी करने का भरोसा दिया गया था लेकिन आश्वासन पूरा नहीं हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक आयुष्मान और चिरायु योजनाओं के तहत इलाज का दायरा बहुत बढ़ गया है लेकिन उसके हिसाब से बजट नहीं बढ़ाया गया। इससे निजी अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। आईएमए का कहना है कि नियम के अनुसार 15 दिन में भुगतान होना चाहिए लेकिन कई मामलों में 3 से 5 महीने और कुछ इलाजों में 6 से 9 महीने तक की देरी हो रही है।

अस्पतालों पर हो रही बेवजह कार्रवाई

संगठन का कहना है कि पोर्टल बदलने से कई पुराने मामलों का रिकॉर्ड गड़बड़ा गया और कई अस्पतालों की छोटी गलतियों को भी फ्रॉड बताकर उन पर कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री के आईएमए प्रतिनिधियों को समितियों में शामिल करने के आदेश अब तक लागू नहीं किए गए हैं और कई समितियों की बैठकें महीनों से नहीं हुई हैं।

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