Baba Neeb Karori life miracles and mysteries : कैंची धाम के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे। नैनीताल से 65 किलोमीटर दूर कैंची धाम की मान्यता है कि यहां से कोई खाली नहीं जाता। यही कारण है कि यहां लोग हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं।
1961 में यहां आए थे बाबा
हर साल 15 जून को यहां पर विशाल मेले और भंडारे का आयोजन होता है। यहां इस दिन इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में हुई थी। बाबा 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया। मान्यता है कि बाबा नीब करौरी को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। वे आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला।
पानी से बनवा दिया था प्रसाद
आम आदमी की तरह जीने वाले बाबा किसी को पैर नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे। बाबा नीब करौरी के इस पावन धाम को लेकर तमाम तरह के चमत्कार जुड़े हैं। एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने के लिए जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया।
रेलगाड़ी से उतारा तो नहीं बढ़ी आगे
ऐसे ही एक बार बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए उसे बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुचंवाया। ऐसे न जाने कितने किस्से बाबा और उनके पावन धाम से जुड़े हैं, जिन्हें सुनकर लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। इसके अलावा उनसे एक किस्सा और भी जुड़ा है कि एक बार टिकट नहीं होने के कारण उन्हें रेलगाड़ी से उतार दिया गया। इसके बाद सब कुछ थम गया। रेलवे ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन रेलगाड़ी हिल भी नहीं पाई। माफी मांगने के बाद बाबा दोबारा रेलगाड़ी में बैठे तो वह हिली।
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