
कुरुक्षेत्र। बैसाखी महोत्सव 2026 में आयोजित प्रदर्शनी में सिख इतिहास पर आधारित खालसा पंथ की स्थापना को विस्तार से समझाया। दर्शकों ने पंच प्यारे, पांच ककारों, पांच तख्त साहिब और पांच शीशों के बलिदान को जाना।
प्रदर्शनी में पहुंचने वाले नागरिकों ने अपने बच्चों व युवाओं को सिख बलिदान को दिखाते हुए सीख लेने के लिए कहा। डीस ने कहा कि केडीबी मेला ग्राउंड में आयोजित इस राज्य स्तरीय बैसाखी महोत्सव की सिख इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया था। इसमें दिखाया गया कि बैसाखी के अवसर पर गुरु गोबिंद सिंह ने जुल्म के खिलाफ और मानवता की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्थापना की।

उन्होंने कहा कि सन 1699 की बैसाखी के दिन ही गुरु गोबिंद सिंह ने श्री आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती पर एक विशाल दीवान सजाया गया। इस दीवान के दौरान गुरु साहिब ने लोगों पर बढ़ते जुर्म को रोकने के लिए पांच शीशों की मांग की। गुरुजी के हुक्म को स्वीकार करते हुए सबसे पहले भाई दया सिंह ने गुरुजी को अपना शीश भेंट किया। फिर भाई धर्म सिंह, भाई हिम्मत सिंह, भाई साहिब सिंह और भाई मोहकम सिंह ने भी गुरु साहिब के हुक्म को स्वीकार करते हुए अपना सीस गुरु चरणों में अर्पित किया।
डीसी ने कहा कि इन पांच प्यारों को गुरु साहिब ने खंडे बाटे की पाहुल (अमृत) छकाकर खालसा को प्रकट किया। अमृत छकाने के उपरांत गुरु साहिब जी ने सिखों को सिंह और कौर का खिताब देकर सम्मानित किया। अमृत छकाने के उपरांत गुरु साहिब जी ने स्वयं पांच प्यारों से खंडे बाटे की पाहुल ग्रहण की। गुरु साहिब जी ने अमृतधारी सिखों को पांच ककारों की रहित बख्शी, इनमें केश, कड़ा, कंघा, कृपाण, कच्छहरा शामिल है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में खालसा की प्रकट धरती तख्त श्री केशगढ़ साहिब, श्री आनंदपुर साहिब सहित पांच तख्त साहिब का प्रदर्शन किया गया है, इनमें तख्त श्री अकाल तख्त साहिब श्री अमृतसर साहिब, तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब, तख्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब, तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो और तख्त श्री सचखंड हजूर साहिब नांदेड़ शामिल है।
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