इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश इस समय हिंसा की आग में जल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा और गहरी हो गई है। हिंसा से त्रस्त कई हिंदू नागरिक अब अपनी जान बचाने के लिए भारत से सीमाएं खोलने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में वे खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नजर नहीं आता।
निर्वासन में रह रहे सनातन जागरण मंच के नेता निहार हलदर की मदद से रंगपुर, चटगांव, ढाका और मयमनसिंह में रहने वाले हिंदू नागरिकों से बातचीत की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये बातचीत व्हाट्सएप कॉल के जरिए हुई।
ये भी पढ़ें: America में बर्फीले तूफान ने बढ़ाई यात्रियों की परेशानी, रद्द हुईं 1802 फ्लाइटें, 22349 में विलंब
रंगपुर के 52 वर्षीय एक हिंदू नागरिक ने बताया कि वे केवल अपने धर्म के कारण रोज अपमान झेल रहे हैं। सड़क पर चलते समय ताने सुनना आम हो गया है और उन्हें डर है कि यह नफरत कभी भी हिंसक भीड़ में बदल सकती है। हिंदू समुदाय खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा है। हमारे पास न तो कहीं जाने का रास्ता है और न ही सुरक्षा की कोई गारंटी। हम इसलिए चुप रहते हैं, क्योंकि डर है कि कहीं हमारे साथ भी दीपू या अमृत जैसा हश्र न हो जाए।
राजनीतिक हालात ने बढ़ाई चिंता
ढाका में रहने वाले एक अन्य हिंदू नागरिक ने बताया कि दीपू दास की पीट-पीटकर हत्या ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। वहीं पूर्व राष्ट्रपति खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि अगर बीएनपी सत्ता में आती है, तो हिंदुओं पर अत्याचार और बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, शेख हसीना की अवामी लीग सरकार ही अब तक हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए एक तरह की ढाल बनी हुई थी।
सनातन जागरण मंच के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बांग्लादेश में करीब 25 लाख हिंदू रहते हैं और यह कोई छोटी संख्या नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कई हिंदू संगठन सिर्फ दिखावटी बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस मदद नहीं मिल रही। उनका कहना है कि हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जैसे देश किसी बड़े नरसंहार की ओर बढ़ रहा हो।
Video: कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय ताइक्वांडो टूर्नामेंट का उद्घाटन
सीमाएं खुलने से मिलेगी राहत की सांस
मयमनसिंह के एक निवासी ने कहा कि सीमाएं खुलने का मतलब यह नहीं है कि सभी हिंदू भारत पलायन कर जाएंगे, लेकिन कम से कम हिंसा से बचने का एक सुरक्षित रास्ता तो मिलेगा।
ढाका के एक अन्य हिंदू नागरिक ने बताया कि वे सबसे बुरे सपने जैसी जिंदगी जी रहे हैं। अगर भारत की सीमाएं खोली जाती हैं, तो उत्पीड़न झेल रहे लोगों के लिए कम से कम जान बचाने का एक विकल्प जरूर होगा।

