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कैंसर के इलाज में बड़ी राहत: भारत की इस दवा को मिली मंजूरी

नेशनल डेस्क: आज के समय में गलत खानपान, तनावभरी दिनचर्या और कम शारीरिक गतिविधि लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। डायबिटीज, दिल की बीमारियां और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। इन सबके बीच कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल के आंकड़े बताते हैं कि साल 2022 में दुनिया भर में करीब 9.7 मिलियन (97 लाख) लोगों की मौत कैंसर से हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर रफ्तार यही रही, तो साल 2050 तक यह संख्या बढ़कर 18.2 मिलियन (1.82 करोड़) तक पहुंच सकती है।

क्यों बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले?

शोधों के अनुसार, कैंसर से होने वाली लगभग एक-तिहाई मौतें तंबाकू और शराब का सेवन, ज्यादा वजन या हाई बॉडी मास इंडेक्स और रोजमर्रा में शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होती हैं। साल 2022 में सबसे ज्यादा मौतें फेफड़े, स्तन (ब्रेस्ट) और कोलोरेक्टल कैंसर के कारण दर्ज की गईं।

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इलाज में नई उम्मीद

इसी बीच कैंसर के मरीजों के इलाज को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है। दवा निर्माता कंपनी ल्यूपिन ने बताया है कि उसे एक अहम बायोसिमिलर दवा के लिए अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक- यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से मंजूरी मिल गई है। कंपनी के अनुसार, FDA ने आर्मलुपेग (Pegfilgrastim-onne) 6 mg/0.6 mL इंजेक्शन को हरी झंडी दे दी है। यह दवा प्रसिद्ध इंजेक्शन न्यूलास्टा (Pegfilgrastim) का बायोसिमिलर संस्करण है।

किसके लिए फायदेमंद होगी यह दवा?

आर्मलुपेग का इस्तेमाल उन कैंसर मरीजों में किया जाता है, जिनमें कीमोथेरेपी के दौरान न्यूट्रोपेनिया (शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना) का खतरा बढ़ जाता है। यह इंजेक्शन संक्रमण के मामलों को कम करता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। दवा को सिंगल-डोज प्री-फिल्ड सिरिंज के रूप में पेश किया जाएगा, जिससे अस्पतालों और मरीजों दोनों के लिए इसे इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा।

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कंपनी का क्या कहना है?

ल्यूपिन की सीईओ विनीता गुप्ता ने कहा कि यह मंजूरी कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी राहत है। हमारा लक्ष्य है कि मरीजों को बेहतर इलाज कम कीमत में उपलब्ध हो सके। आने वाले वर्षों में हम और भी बायोसिमिलर दवाओं को बाजार में लाने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर हो।

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