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Marco Rubio India Visit: द्विपक्षीय वार्ता के बाद रूबियो बोले, ‘भारत हमारा अहम रणनीतिक साझेदार’

Marco Rubio India Visit

नई दिल्लीः अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत-अमेरिका को समान विचारधारा वाले देश बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक रूप से एक जैसी सोच रखते हैं, जिनमें ‘क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन्स और टेररिज्म’ शामिल हैं। उन्होंने भारत को अमेरिका का “दुनिया के सबसे अहम रणनीतिक साझेदारों में से एक” करार दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों को वैश्विक आतंकवादी नेटवर्कों के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश होने के नाते सार्वजनिक निगरानी और जवाबदेही के महत्व को समझते हैं।

रूबियो ने कहा, “मुझे हर निर्णय के लिए अमेरिकी जनता को जवाब देना पड़ता है और राष्ट्रपति को भी यह बताना पड़ता है कि यह हमारे देश के लिए क्यों अच्छा है। यहां भारत में भी आपके नेताओं को यही करना होता है। बताना पड़ता है कि अमेरिका के साथ आपकी साझेदारी या किसी मुद्दे पर आपका रुख देश के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है? यह लगभग हर देश में होता है, लेकिन लोकतांत्रिक देशों में ऐसा विशेष तौर पर देखा जाता है।”

 

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में जवाबदेही सीधे जनता के प्रति होती है। यहां विपक्षी दल होते हैं, स्वतंत्र मीडिया होता है। भारत में मीडिया बहुत है। इसका मतलब है अधिक जांच और अधिक निगरानी। यही चीज हमारे हितों को जोड़ती है, क्योंकि दोनों देश यह समझते हैं कि हर निर्णय और हर सहयोग को जनता के सामने जाकर सही ठहराना होता है।”

मार्को रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी केवल क्षेत्रीय मुद्दों तक सिमटी नहीं है। दोनों देशों के लिए 21वीं सदी में महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच बनाना एक अहम मुद्दा है, और किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने कहा, “हम कई मुद्दों पर समान रणनीतिक हित साझा करते हैं, चाहे वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र हो, होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की स्थिति हो या अन्य वैश्विक घटनाएं।” आतंकवाद पर उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क्स से पीड़ित रहे हैं और इसी कारण आतंकवाद-रोधी सहयोग मजबूत है।

उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में सहयोग पर भी जोर दिया और कहा कि नई तकनीकों के लाभ और जोखिम दोनों होते हैं, और उन्हें संतुलित करना 21वीं सदी की बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने अपनी भारत यात्रा को “शानदार” बताया और भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार” बताया।

रूबियो ने कहा, “रणनीतिक साझेदारी का मतलब केवल किसी एक क्षेत्र में सहयोग नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर साझा हितों के आधार पर मिलकर काम करना है। भारत हमारे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है।” उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी साझा मूल्यों पर आधारित है क्योंकि दोनों दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, और दोनों देशों में राजनेता जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।

 

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