चेन्नई: तमिलनाडु में चुनाव से पहले राजनीति में भूचाल आ गया। बता दें कि टी.टी.वी. दिनाकरन की पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया। राज्य में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह घटनाक्रम भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
AMMK प्रमुख टी.टी.वी. दिनाकरन ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पार्टी ने “धोखा” दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनकी पार्टी NDA का हिस्सा नहीं रहेगी और दिसंबर में आगे की रणनीति का ऐलान किया जाएगा।
“दिल्ली से किसी बदलाव की उम्मीद थी
दिनाकरन ने कहा, “हमने लंबे समय तक इंतजार किया कि शायद दिल्ली में बैठे नेताओं का रवैया बदलेगा या फिर नेतृत्व में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमें महसूस हुआ कि हम सिर्फ दूसरों का बोझ ढो रहे हैं। हम मूर्ख नहीं हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि AMMK की नींव ही “राजनीतिक विश्वासघात” के खिलाफ रखी गई थी, और अब फिर से वैसा ही अनुभव हो रहा है।
AMMK का सफर और हालिया प्रदर्शन
टी.टी.वी. दिनाकरन ने 2018 में AMMK की स्थापना की थी, जब उन्हें अन्नाद्रमुक (AIADMK) से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने जयललिता की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करते हुए नई पार्टी बनाई, जो तमिलनाडु की जनता के हक और आत्मसम्मान की आवाज बनने का दावा करती रही है।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में AMMK को बड़ा झटका लगा। पार्टी ने NDA गठबंधन के तहत थेनी और तिरुचिरापल्ली सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ही सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। खुद दिनाकरन थेनी से चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
तमिलनाडु में NDA के लिए बढ़ी चुनौतियां
AMMK से पहले ओ. पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व वाली एक और पार्टी भी NDA से अलग हो चुकी है। ऐसे में NDA के सामने राज्य में सहयोगी दलों को जोड़े रखने की चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, AIADMK ने अप्रैल 2024 में एक बार फिर BJP से गठबंधन कर लिया था और वर्तमान में राज्य में NDA का चेहरा बनी हुई है।
AMMK के NDA छोड़ने से BJP की तमिलनाडु में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिशों को झटका लग सकता है। अब सबकी निगाहें दिसंबर पर टिकी हैं, जब दिनाकरन अपनी पार्टी की नई रणनीति की घोषणा करेंगे।
मेष: दिन शुभ रहेगा...