नेशनल डेस्क। दिल्ली से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बीजेपी की पार्षद रेणु चौधरी एक विदेशी फुटबॉल कोच से बेहद खराब और धमकी भरे लहजे में बात करती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस मामले को लेकर विवाद बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, यह विदेशी फुटबॉल कोच अफ्रीकी देश से है और पिछले करीब 12 सालों से दिल्ली के एक पार्क में भारतीय बच्चों को फुटबॉल सिखा रहा है। वह बच्चों को खेल की ट्रेनिंग देता है और लंबे समय से उसी पार्क में अभ्यास करवा रहा है।
‘हिंदी सीखो, नहीं तो पार्क छोड़ दो’
वायरल वीडियो में बीजेपी पार्षद रेणु चौधरी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, तुमने अब तक हिंदी क्यों नहीं सीखी? अगर कोई अपराध हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा? तुम इस देश का पैसा कमा रहे हो और यहां की भाषा तक नहीं सीख रहे। अगर एक महीने में हिंदी नहीं सीखी तो यह पार्क तुमसे छीन लिया जाएगा। हिंदी सीखो वरना यहां से चले जाओ। इस बयान को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है।
— Charu singh (@charusingh3000) December 22, 2025
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया गुस्सा
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने पार्षद के व्यवहार की कड़ी आलोचना शुरू कर दी। कई लोगों ने इसे धमकी, भेदभाव और गलत व्यवहार बताया। लोगों का कहना है कि किसी विदेशी नागरिक के साथ इस तरह बात करना बिल्कुल गलत है, खासकर जब वह बच्चों को खेल सिखाने जैसा अच्छा काम कर रहा हो।
कोच बोला-अब अपनी सुरक्षा को लेकर डर लग रहा है
इस पूरे विवाद के बाद अफ्रीकी फुटबॉल कोच ने भी अपनी बात रखी। उसने कहा कि वह सिर्फ बच्चों को फुटबॉल सिखाने का काम करता है, लेकिन अब पार्षद की धमकी के बाद वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। कोच का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो उसे मजबूरी में पार्क छोड़ना पड़ सकता है।
विवाद बढ़ने पर पार्षद ने दी सफाई
वीडियो पर भारी विरोध होने के बाद बीजेपी पार्षद रेणु चौधरी ने एक अलग वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका किसी को धमकाने या अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था। रेणु चौधरी ने कहा कि जिस पार्क में कोच फुटबॉल सिखा रहा है, वह नगर निगम (MCD) के अधीन आता है। अगर वहां किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि होती है तो उसके लिए शुल्क देना जरूरी होता है।
हिंदी न आने से अधिकारियों को परेशानी हो रही थी-पार्षद का दावा
पार्षद के मुताबिक, उन्होंने करीब आठ महीने पहले भी कोच से एमसीडी को रेवेन्यू देने की बात कही थी। लेकिन कोच को हिंदी नहीं आने की वजह से एमसीडी अधिकारियों को उससे बातचीत करने में दिक्कत हो रही थी।
हिंदी सीखने की सलाह…
रेणु चौधरी ने दावा किया कि उन्होंने कोच से सिर्फ इतना कहा था कि वह बुनियादी हिंदी सीख ले, ताकि अधिकारियों से बात करने में परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि वह कोच के लिए हिंदी ट्यूटर का इंतजाम कराने और उसकी फीस खुद देने को भी तैयार थीं, लेकिन कोच ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
मामला बना चर्चा का विषय
फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पार्षद के बयान को गलत बता रहे हैं, वहीं पार्षद इसे प्रशासनिक नियमों से जुड़ा मामला बता रही हैं।
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