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BSF करेगा बड़ा सुरक्षा बदलाव, भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात होगी ‘ड्रोन स्क्वाड्रन’

नई दिल्ली: बीएसएफ भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनाती के लिए पहला ‘ड्रोन स्क्वाड्रन’ तैयार कर रहा है। साथ ही, उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सीखे गए सबक के मद्देनजर घातक यूएवी हमलों के खिलाफ अपनी सुरक्षा व्यवस्था और चौकियों को ‘मजबूत’ करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा प्रतिष्ठान के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस मोर्चे पर विशिष्ट सीमा चौकियों (बीओपी) पर तैनात स्क्वाड्रन में विभिन्न प्रकार के टोही, निगरानी और हमलावर ड्रोन या मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) और विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी शामिल होंगे, जो इन मशीनों को संचालित कर सकेंगे।

सूत्रों ने बताया कि इस स्क्वाड्रन का संचालन चंडीगढ़ स्थित बीएसएफ के पश्चिमी कमान मुख्यालय में स्थित एक नियंत्रण कक्ष द्वारा किया जाएगा। बीएसएफ का मुख्य कार्य भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा की रक्षा करना है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सीमा सुरक्षा बल की ताकत, कमजोरियों और खतरों की हाल ही में समीक्षा के बाद यूनिट के गठन का निर्णय लिया गया। यह अभियान भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी और रक्षा ठिकानों पर हमला करने के लिए शुरू किया गया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के प्रतिशोध के रूप में किया गया। पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

सूत्रों ने बताया कि बीएसएफ ड्रोन स्क्वाड्रन को उत्तर में जम्मू से लेकर देश के पश्चिमी हिस्से में पंजाब, राजस्थान और गुजरात तक 2,000 किलोमीटर से अधिक लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित बीओपी पर तैनात किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि स्क्वाड्रन विभिन्न प्रकार के छोटे और बड़े निगरानी, टोही और हमलावर ड्रोन से लैस होगा, जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी किसी भी ‘युद्ध जैसी स्थिति’ या अभियान के दौरान लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लगभग 2-3 कर्मियों की एक छोटी टीम को ‘असुरक्षित और खास’ सीमा चौकियों पर तैनात किया जाएगा। पहले स्क्वाड्रन के लिए कुछ ड्रोन और उपकरण खरीदे जा रहे हैं और इस कार्य के लिए चुने गए कर्मियों को जत्थों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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