Budget 2026: केंद्र सरकार का आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा और इसके साथ ही बजट की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। हर साल बजट दस्तावेजों की छपाई की शुरुआत एक खास परंपरा ‘हलवा सेरेमनी’ के साथ होती है। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण इस परंपरा को रोक दिया गया था।
बजट प्रिंटिंग की औपचारिक शुरुआत
परंपरा के मुताबिक बजट पेश होने से करीब दो हफ्ते पहले वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी आयोजित की जाती है। इस मौके पर एक बड़ी कढ़ाही में हलवा तैयार किया जाता है, जिसे वित्त मंत्री मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को खिलाते हैं। इसके साथ ही बजट दस्तावेजों की छपाई की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू मानी जाती है।
क्या है हलवा सेरेमनी का मतलब
हलवा सेरेमनी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय बजट प्रणाली का अहम हिस्सा है। मान्यता है कि बजट देश के लिए शुभ और “मीठा” रहे, इसी भावना के साथ हलवे से शुरुआत की जाती है। बजट दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में छपते हैं और उनकी गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
पूरी तरह सील हो जाता है बजट प्रेस
हलवा सेरेमनी के बाद वित्त मंत्रालय के वे अधिकारी और कर्मचारी, जो बजट तैयार करने और छपाई से सीधे जुड़े होते हैं, नॉर्थ ब्लॉक स्थित बजट प्रेस में ही रहते हैं। इस दौरान वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। यहां तक कि परिवार से फोन पर संपर्क करने की भी अनुमति नहीं होती। लोकसभा में बजट पेश होने के बाद ही यह “लॉक-इन” खत्म होता है।
सीमित अधिकारियों को ही घर जाने की छूट
इस अवधि में केवल कुछ बेहद वरिष्ठ अधिकारियों को ही घर जाने की अनुमति मिलती है। आमतौर पर करीब 100 अधिकारी और कर्मचारी इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जो बजट की गोपनीयता और समयबद्ध छपाई सुनिश्चित करते हैं।
कोरोना के बाद अगर इस साल हलवा सेरेमनी की वापसी होती है, तो यह न सिर्फ एक परंपरा की निरंतरता होगी, बल्कि बजट प्रक्रिया में सामान्य स्थिति की ओर लौटने का संकेत भी मानी जाएगी।
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