British Raj: देशभर की छावनियों के रहने वाले लोगों को अब जल्द ही ब्रिटिश राज के इस काले कानून के छुटकारा मिलने जा रहा है क्योंकि रक्षा मंत्रलय की ओर से ब्रिटिश शासन के समय से छावनी परिषद की भूमि पर चलने वाली 5,000 की रजिस्ट्री होने की शर्त जल्द हटने वाली है। पता चला है कि अब अधिकारियों द्वारा कमेटी का गठन करके गाइडलाइंस तैयार की जा रही है ताकि इसे पूर्ण रूप से लागू करवाया जा सके। फिरोजपुर छावनी बोर्ड की बात करें तो यहां पर करीब 5500 रजिस्ट्रियां है जोकि 5,000 से ऊपर की हैं। इन्हें छावनी परिषद द्वारा अवैध माना गया है और 400 लोगो की रजिस्ट्रियां कैंसिल करने के अलावा 300 लोगों के केस वर्तमान में अदालतों में पैंडिंग हैं।
भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा पंजाब के उपाध्यक्ष अभिषेक धवन की मेहनत रंग लाई है, जिन्होंने यह कानून खत्म कराने के लिए जी-तोड़ मेहनत की। इस कानून को खत्म कराने के लिए उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की और आवाज उठाई। इसके अलावा छावनी परिषद के पूर्व मनोनीत सदस्य स्व. एडवोकेट योगेश गुप्ता की ओर से छावनी के कुछ लोगों को साथ लेकर 2 वर्ष पहले अभियान चलाया था और उनके नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। सूत्रों मुताबिक रक्षा मंत्रलय ने 2 मई को कानूनी राय लेने के बाद पत्र जारी कर दिया गया है।
जीजीओ 1836 के कानून चल रहे थे
गौरतलब है कि छावनी की भूमि प्रैजीडैंट ऑफ इंडिया के नाम पर बोलती है और यहां रहने वाली जनता सिर्फ स्ट्रर की मालिक है। यहां पर सिर्फ मलबे की रजिस्ट्री होती है और लोग भूमि के मालिक न होने के कारण छावनी के लोगों को बैंक से लोन भी नहीं मिलते हैं। उन्हें छावनी परिषद की इजाजत के बिना एक ईंट लगाने की परमिशन भी नहीं है। क्षेत्र में जीजीओ 1836 के कानून चलते हैं, जिस कारण लोग ब्रिटिश काल से चले आ रहे नियमों से काफी परेशान हैं।

