Last Updated: September 23, 2026

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घरेलू और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पूंजीगत व्यय में की गयी वृद्धि: सीतारमण

August 8, 2024

घरेलू और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पूंजीगत व्यय में की गयी वृद्धि: सीतारमण

नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरूवार को राज्यसभा में कहा कि घरेलू और वैश्विक चुनौतियों के बीच चालू वित्त वर्ष के बजट में पूंजीगत व्यय में वृद्धि की गयी है और राज्यों को भी 50 वर्षाें के लिए ब्याज मुक्त वित्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है। वित्त मंत्री ने सदन में जम्मू कश्मीर विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक 2024, विनियोग (संख्यांक 2) विधेयक 2024 और वित्त (संख्यांक 2) विधेयक 2024 पर चर्चा का जबाव देते हुये कहा कि बजट में कुल मिलाकर पूंजीगत व्यय 15.02 लाख करोड़ रुपये है जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। कोविड के बाद तथा हाल की वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सरकार न:न सिर्फ घरेलू चुनौतियों का बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच पूंजीगत व्यय में बढोतरी कर रही है और राज्यों को 50 वर्षाें के लिए ब्याज मुक्त पूंजी भी उपलब्ध करा रही है। बाद में इन विधेयको को सदन ने ध्वनिमत से लोकसभा लौटा दिया।

उन्होंने कहा कि देश में विनिर्माण पर जोर दिया गया है ताकि रोजगार सृजन में बढोतरी हो सके। सरकार की मंशा घरेलू स्तर पर रोजगार के अवसर और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना है। कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रोें के व्यय में बढोतरी की गयी है। शिक्षा, महिला एवं बाल विकास , सामाजिक कल्याण सहित लगभग हर क्षेत्र के व्यय में बढोतरी की गयी है। वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय बजट में इस वर्ष कई मामलों में संतुलन बनाया गया है। वित्तीय समायोजन के साथ ही राजकोषीय घाटे पर भी ध्यान दिया गया है ताकि अगले वित्त वर्ष में इसको और नीचे लाया जा सके। बजट में कौशल विकास और इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए किये प्रावधानों को उल्लेख करते हुये कहा कि ये 2047 तक विकसित भारत की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को 17 हजार करोड़ रुपये की मदद दी गयी है। उन्होंने ग्लोबल हंगर सूचकांक में भारत के माली, सीरिया और पाकिस्तान से भी नीचे रहने के मुद्दे पर कहा कि देश में 80 करोड़ लोगों को अनाज देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भूखा नहीं रहे। उन्होंने कहा कि ग्लोबल हंगर सूचकांक बहुत बड़ा मिथक है। उन्होंने कहा कि इससे जुड़े कई सूचकांकों में देश में सुधार हुआ है और इसके मद्देनजर इसकी समीक्षा किये जाने की जरूरत है।

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