Red Tape company news: हरियाणा के रोहतक में एक ग्राहक से कैरी बैग के लिए 10 रुपये अतिरिक्त लेना एक जूता कंपनी को भारी पड़ गया। करीब तीन साल तक चले कानूनी विवाद के बाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फुटवियर कंपनी रेड टेप को 8,000 रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।
मामला वर्ष 2023 का है। रोहतक के एक 27 वर्षीय ग्राहक ने रेड टेप के शोरूम से 2,069.70 रुपये के जूते खरीदे थे। खरीदारी के दौरान कंपनी ने कैरी बैग देने के लिए उससे 10 रुपये अतिरिक्त वसूल लिए। ग्राहक ने मुफ्त कैरी बैग देने की मांग की, लेकिन स्टोर कर्मचारियों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कंपनी की नीति के अनुसार बैग के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है। इससे नाराज ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि कंपनी ने गैरकानूनी तरीके से पैसे वसूले और इस कारण उसे मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान तथा सदस्य तृप्ति पन्नू और डॉ. विजेंद्र सिंह की पीठ ने की। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि किसी ग्राहक से खरीदे गए सामान को ले जाने के लिए कैरी बैग के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि कैरी बैग के लिए शुल्क लेने का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था। कंपनी का तर्क था कि इससे ग्राहक अपने साथ बैग लाने के लिए प्रेरित होंगे और प्लास्टिक के उपयोग में कमी आएगी। कंपनी ने यह भी कहा कि ग्राहकों के लिए कैरी बैग खरीदना अनिवार्य नहीं था।
हालांकि, आयोग ने कंपनी की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान की जिम्मेदारी है कि वह ग्राहक को खरीदा गया सामान उचित तरीके से उपलब्ध कराए। ऐसे में सामान ले जाने के लिए आवश्यक कैरी बैग पर अलग से शुल्क वसूलना उचित नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने रेड टेप को आदेश दिया कि वह ग्राहक से लिए गए 10 रुपये वापस करे। इसके अलावा सेवा में कमी के लिए 4,000 रुपये मुआवजा और 4,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में कुल 8,010 रुपये का भुगतान 30 दिनों के भीतर करे।
उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि राशि छोटी हो या बड़ी, यदि किसी उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और दोषी पक्ष को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।