Last Updated: October 26, 2026

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661 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में CBI की कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, अधिकारियों की मिलीभगत के मिले सबूत

June 7, 2026

661 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में CBI की कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, अधिकारियों की मिलीभगत के मिले सबूत

नई दिल्लीः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े सरकारी फंड के गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने शनिवार को दिल्ली-एनसीआर समेत छह जगहों पर छापे मारे। जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि सरकारी अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर अकाउंट खुलवाने, फंड ट्रांसफर करने और बाद में उसे दूसरी जगह भेजने में मदद की थी।

तलाशी अभियान चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर स्थित परिसरों में चलाया गया। इसमें हरियाणा कैडर के सीनियर सरकारी अधिकारियों और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर के घर और ऑफिस शामिल थे। सीबीआई के अनुसार, जांच में सामने आया है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर खातों के खुलवाने, धनराशि के हस्तांतरण और बाद में उसके दुरुपयोग में सहायता की।

आरोप है कि उन्हें इस मदद और कार्रवाई न करने के बदले गलत तरीके से फायदा मिला। पता चला कि नोएडा की विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड को अपराध से मिली रकम अपने अकाउंट में मिली थी, जिसे बाद में डायरेक्टर के पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, प्रॉपर्टी के कागजात और दूसरी जरूरी चीजें जब्त की गईं।

सीबीआई ने यह जांच हरियाणा राज्य सतर्कता व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से प्राप्त एक मामले व चंडीगढ़ आर्थिक अपराध थाना में मूल रूप से दर्ज दो मामलों को अपने हाथ में लेने के बाद शुरू की थी।

ये मामले आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन व बैंक अधिकारियों और लोक सेवकों की मिलीभगत से किए गए अन्य अपराधों से संबंधित हैं। इस घोटाले से हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों को प्रभावित होना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 661 करोड़ रुपए के सरकारी धन का गबन हुआ।

शुरुआती जांच पूरी करने के बाद, सीबीआई ने पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें दो विभागों – हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (हरियाणा सरकार) – के सरकारी अधिकारियों की भूमिका का विवरण दिया गया है।

चार्जशीट में उस तरीके के बारे में भी बताया गया है जिससे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में रखे हरियाणा सरकार के फंड को धोखाधड़ी से निकाला गया था। तीनों मामलों में जांच तेजी से चल रही है और इसमें शामिल पाए गए सभी लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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