Last Updated: November 6, 2026

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Singapore स्कैम मामले में CBI की बड़ी सफलता, 2013 से फरार आरोपी हरनेक सिंह को भारत लाया गया

September 10, 2026

Singapore स्कैम मामले में CBI की बड़ी सफलता, 2013 से फरार आरोपी हरनेक सिंह को भारत लाया गया

नेशनल डेस्कः केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सिंगापुर से जुड़े एक बड़े साइबर ठगी मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। CBI ने इस मामले में साल 2013 से फरार चल रहे आरोपी हरनेक सिंह को अमेरिका से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। हरनेक सिंह के खिलाफ पहले से ही इंटरपोल रेड नोटिस जारी था। इसके अलावा उसके पासपोर्ट के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया गया था। अमेरिका से डिपोर्ट किए जाने के बाद उसे भारत लाया गया।

दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही गिरफ्तार
हरनेक सिंह को 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही CBI अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया। CBI अब उसे जल्द ही हरियाणा के पंचकूला में स्थित CBI मामलों की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पेश करेगी। अदालत में उसके खिलाफ चल रहे मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

2013 में सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों को बनाया गया था निशाना
CBI की जांच के अनुसार, साल 2013 में भारत से साइबर ठगी करने वाले लोगों ने सिंगापुर में रहने और काम करने वाले भारतीय नागरिकों को फोन किए थे। ठग फोन पर खुद को सिंगापुर के इमिग्रेशन अधिकारी बताते थे। वे लोगों को डराते थे कि उनके एयरपोर्ट पर जमा किए गए डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी पाई गई है। इसके बाद पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है और उन्हें सिंगापुर से बाहर भी निकाला जा सकता है।

कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर मांगे जाते थे पैसे
साइबर ठग पीड़ितों को इस तरह डराते थे कि वे कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पैसे देने को तैयार हो जाएं। पीड़ितों से कथित सेटलमेंट फीस या जुर्माने के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। उन्हें Western Union Money Transfer के माध्यम से भारत में मौजूद लोगों के पास रकम भेजने के लिए मजबूर किया जाता था। इस तरह ठगों ने विदेश में रहने वाले भारतीयों को डराकर उनसे बड़ी रकम वसूलने की साजिश रची थी।

जांच में हरनेक सिंह का नाम कैसे सामने आया?
CBI की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से हासिल की गई रकम हरनेक सिंह द्वारा चलाए जा रहे मनी ट्रांसफर आउटलेट के जरिए प्राप्त की जाती थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे मामले में हरनेक सिंह के साथ आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन भी आरोपी थे। इन लोगों की भूमिका ठगी की रकम को हासिल करने और उसे आगे पहुंचाने में सामने आई थी।

2016 में CBI ने दर्ज किया था मामला
इस मामले में CBI की दिल्ली इकाई ने साल 2016 में केस दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान CBI ने पूरे नेटवर्क और ठगी की रकम के लेन-देन की जानकारी जुटाई। इसी जांच में हरनेक सिंह की भूमिका भी सामने आई।

मई 2013 में भारत से फरार हो गया था हरनेक
CBI के मुताबिक, हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से फरार हो गया था। इसके बाद वह कथित तौर पर अवैध तरीके से अमेरिका पहुंच गया और वहां लंबे समय तक छिपा रहा। वह एक दशक से ज्यादा समय तक भारतीय जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा। हालांकि CBI ने उसकी तलाश जारी रखी और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

सह-आरोपियों को 2025 में दोषी ठहराया गया
इस मामले में हरनेक सिंह के साथ आरोपी बनाए गए आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ पंचकूला की अदालत में सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने 26 मई 2025 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। वहीं हरनेक सिंह के विदेश में फरार होने के कारण उसके खिलाफ मामले की कार्रवाई अलग से जारी रही।

अदालत ने जारी किया था गैर-जमानती वारंट
हरनेक सिंह को अमेरिका में अमेरिकी न्याय विभाग के माध्यम से समन और जमानती वारंट भी तामील कराया गया था। इसके बावजूद वह भारत की ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इसके बाद पंचकूला स्थित CBI मामलों की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को उसके खिलाफ ओपन-डेटेड गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। इस वारंट के बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो गई।

इंटरपोल की मदद से CBI ने बढ़ाई कार्रवाई
हरनेक सिंह के विदेश में होने की जानकारी मिलने के बाद CBI ने इंटरपोल के माध्यम से उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की। CBI की कोशिशों के बाद उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया। साथ ही उसके पासपोर्ट के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कराया गया। इन अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्रवाइयों से उसके भारत लौटने और गिरफ्तार किए जाने का रास्ता साफ हुआ।

अमेरिका से डिपोर्ट होकर पहुंचा भारत
लंबे समय तक फरार रहने के बाद हरनेक सिंह को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। इसके बाद वह 9 सितंबर 2026 को भारत पहुंचा। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचते ही CBI अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब उसे पंचकूला की संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा, जहां मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

साइबर ठगी के खिलाफ CBI की लगातार कार्रवाई
यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग किस तरह विदेश में रहने वाले भारतीयों को सरकारी अधिकारी बनकर डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं। CBI इससे पहले भी विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को ‘साइबर स्लेवरी’ में फंसाने वाले ठगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। ऐसे मामलों में एजेंसी लगातार आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और विदेश भाग चुके आरोपियों को भारत वापस लाने की कोशिश कर रही है। हरनेक सिंह की गिरफ्तारी को भी इसी दिशा में CBI की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

 

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