नई दिल्ली: देश में कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूल कल्चर पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा मंत्रालय और CBSE एक बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। अब बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही Centre for Advanced Studies (CAS) स्थापित किए जाएंगे, जहां छात्र स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकेंगे। यह पहल छात्रों को घर के पास ही उच्च स्तरीय मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।
क्या है CAS (Centre for Advanced Studies)?
CBSE द्वारा प्रस्तावित यह योजना स्कूल परिसरों में ही ऐसे विशेष केंद्र शुरू करने की है, जहां छात्रों को इंजीनियरिंग (JEE), मेडिकल (NEET), लॉ (CLAT), यूनिवर्सिटी एंट्रेंस (CUET) जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी स्कूल टाइम में ही कराई जाएगी।
कक्षाएं स्कूल टाइम में ही होंगी
छात्र अपनी इच्छा से नामांकन ले सकेंगे। किसी भी छात्र पर CAS में शामिल होने का दबाव नहीं होगा।
जो छात्र इसमें भाग नहीं लेंगे, उन्हें ‘स्टैंडर्ड’ कक्षाओं में पढ़ाई का पूरा अवसर मिलेगा। अलग होंगे CAS के शिक्षक, नहीं होगी कोचिंग संस्थानों की एंट्री,CBSE की सिफारिश है कि स्कूलों को CAS के लिए अलग शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी। साथ ही, किसी भी कोचिंग संस्थान से साझेदारी की इजाजत नहीं दी जाएगी, जिससे शैक्षिक माहौल स्वच्छ और स्कूल-केंद्रित बना रहे।
CAS के शिक्षक या तो स्कूल के मौजूदा प्रशिक्षित शिक्षक होंगे या फिर नई भर्तियाँ की जाएंगी।
फ्रेंचाइज़ी मॉडल या डमी स्कूल सिस्टम की अनुमति नहीं होगी।
छात्रों और अभिभावकों की पूर्व काउंसलिंग की जाएगी, ताकि वे सही निर्णय ले सकें।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस मॉडल भी लागू होगा
शिक्षा मंत्रालय की हाई लेवल कमिटी के अनुसार, स्कूलों में Professor of Practice मॉडल भी लागू किया जाएगा। इसके तहत:
प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति सिखाने के लिए डोमेन एक्सपर्ट्स को विजिटिंग फैकल्टी के रूप में आमंत्रित किया जाएगा
शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे छात्रों को बेहतर दिशा दे सकें
CBSE खुद बनाएगा स्पेशल स्टडी मटीरियल
बोर्ड उन विषयों के लिए एडवांस स्टडी मॉड्यूल्स और डिजिटल संसाधन तैयार करेगा, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाएगी:
मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, इकोनॉमिक्स, लीगल स्टडीज, अकाउंट्स आदि शामिल
असाइनमेंट, हैंडआउट्स और मॉड्यूल आधारित बुकलेट्स डिजिटल और प्रिंट दोनों रूपों में उपलब्ध होंगे
हर विषय में दो स्तर का विकल्प
CBSE मैथ्स की तरह अन्य विषयों में भी स्टैंडर्ड और एडवांस लेवल का विकल्प दे सकता है। छात्र अपनी योग्यता और भविष्य की योजनाओं के आधार पर कोई भी लेवल चुन सकते हैं। इससे स्कूलों में कंपीटेंसी बेस्ड एजुकेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
छात्रों के लिए क्या फायदे होंगे?
महंगी कोचिंग पर निर्भरता कम होगी
मानसिक दबाव और समय की बचत
स्कूल और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी साथ-साथ
शिक्षकों और एक्सपर्ट्स से सीधा मार्गदर्शन
एक पारदर्शी और समावेशी शिक्षा प्रणाली
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