नेशनल डेस्क : ऑपरेशन सिंदूर की शानदार सफलता के बाद भारतीय स्वदेशी हथियारों के निर्माण की चर्चा हर तरफ हो रही है। बता दें कि भारतीय सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस और भारतीय डिफेंस सिस्टम आकाश की ताकतवर क्षमता देख दुनिया भी हैरान है। माना जा रहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद बड़ी सैन्य डील की संभावना है।
विशेषज्ञ मानकर चल रहे थे कि भारत जल्द ही 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की खरीद के लिए किसी देश के साथ करार कर सकता है। अब भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश के साथ ऐसा करार नहीं करने वाली है। भारत अपना खुद का स्वदेशी तकनीक से बना 5वीं पीढ़ी का विमान बनाएगा। इसके अलावा सरकार ने रक्षा मामले में एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 3 बड़ी और 7 अन्य योजनाओं की खरीद को भी झंडी दे दी है।
समुद्र में और कड़ी होगी सुरक्षा
सरकार ने मुख्य तौर पर एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम, स्पाई एयरक्राफ्ट और माइन्स स्वीपर की खरीद को झंडी दी है, इनका निर्माण भारत में ही स्वदेशी तकनीक से किया गया है। खरीद में शामिल माइन काउंटरमेजर्स वेसल्स की कीमत 44 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिनकी संख्या 12 है। बताया जा रहा है कि ये 900 से 1000 टन तक वारहेड ले जाने वाले डिस्प्लेस्मेंट क्षमता वाले वारशिप हैं।
कई बार दुश्मन देश समुद्री रास्ते में माइन्स बिछा देता है, ताकि रास्ता बाधित किया जा सके। अब युद्धपोतों और पनडुब्बियों की सुरक्षा के लिए माइन्स स्वीपर खरीदे जाएंगे, जो समुद्र के अंदर पोतों के आगे चलकर सेफ मार्ग उपलब्ध करवाएंगे। डीआरडीओ ने हाल ही में क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM) मिसाइल को डेवलप किया है।
मिसाइलों की खरीद पर खर्च होंगे 36 हजार करोड़
सरकार ने इसकी खरीद को 36 हजार करोड़ रुपये खर्च कर हरी झंडी दे दी है। सबसे पहले इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के मिसाइलों के 3-3 क्वायड्रन मिलेंगे। हालांकि सेना ने इसकी 11 रेजिमेंट्स की जरूरत बताई है। इस मिसाइल को लाना ले जाना आसान है, जो दुश्मन के विमान को 30 किलोमीटर दूर से ही इंटरसेप्ट कर लेगी।
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