गोवा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गोवा में कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ अगले तीन वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। शाह ने कहा कि इस अभियान के चार प्रमुख स्तंभ होंगे- इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर व सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, डिमांड एवं हार्म रिडक्शन तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय। जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश की कमान संभाली, उस समय भारत के सामने आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद, नक्सलवाद तथा पूर्वोत्तर में सक्रिय विभिन्न हथियारबंद गुट प्रमुख थे। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में बम धमाकों जैसी घटनाएं भी चुनौती बनी हुई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2019 से अब तक आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।
Our vision document and roadmap (for drug control and achieving a Nasha Mukt Bharat) are based on four pillars:
1. Intelligence and operations-based enforcement.
2. Control of precursor and synthetic drugs.
3. Demand and harm reduction.
4. Coordination.– Shri @AmitShah… pic.twitter.com/BpwuSROI3E
— BJP (@BJP4India) September 6, 2026
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अलगाववाद की भावना में कमी आई है और आतंकवाद पर भी प्रभावी तरीके से अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और वहां के लोगों तथा देश के बाकी हिस्सों के बीच की दूरी कम करने के प्रयास किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या अब समाप्ति की ओर है। जिन लोगों ने तिरुपति से पशुपतिनाथ तक ‘रेड कॉरिडोर’ बनाने का सपना देखा था, उनमें से कई लोगों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया है और मुख्यधारा में लौटने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
पूर्वोत्तर में भी लगभग 10,000 युवाओं ने हथियार छोड़े हैं। केंद्र सरकार ने विभिन्न संगठनों के साथ 14 से अधिक समझौते किए हैं और पूर्वोत्तर अब विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमित शाह ने कहा कि 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण कर उन्हें भारत की अदालतों के समक्ष लाया गया है। पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए जबकि जुलाई 2026 तक 182 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
प्रत्येक एजेंसी के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं और उन्हें पूरा करने के लिए तिमाही समय सीमा भी तय की गई है। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के पुनर्वास के लिए ‘मानस हेल्पलाइन’ (1933) शुरू की गई है। इसके साथ ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के कैडर का पुनर्गठन किया गया है। निदान पोर्टल के माध्यम से नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है। सीसीटीएनएस डेटा और इंटीग्रेटेड डेटा फ्यूजन का इस्तेमाल करते हुए ड्रग्स के हॉटस्पॉट, अपराध के तौर-तरीकों और जब्ती की घटनाओं का देशव्यापी डेटा आधारित नक्शा तैयार किया गया है।
सरकार ने ड्रग्स नेटवर्क की जांच के लिए ‘नीचे से ऊपर’ और ‘ऊपर से नीचे’ दोनों तरीकों को अपनाया है। यदि ड्रग्स का छोटा पैकेट भी बरामद होता है, तो उसके स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाती है। वहीं, सीमा पर ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़े जाने पर उसके स्रोत से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरे नेटवर्क की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है

