नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा को मौजूदा के 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत और पैंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ के दायरे में आ सकते हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा, संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर, 2026 यानी ‘विश्वकर्मा पूजा’ के दिन से प्रभावी होगी। ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 के बीच अपरिवर्तित रही थी और सितंबर, 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रति माह किया गया था। सितंबर, 2014 से पहले वेतन सीमा 6,500 रुपए प्रति माह थी।
सरकार ने कहा कि पिछले वर्षों में वेतन और आय में लगातार वृद्धि तथा संगठित क्षेत्र में बढ़े रोजगार को देखते हुए अब इसे बढ़ाकर 25,000 रुपए किया गया है। इस फैसले से सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है, जबकि मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपए है। 5 वर्षों में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपए होगा।