Last Updated: September 21, 2026

Dainik Savera Times Logo

छबील : हर बूंद में त्याग, बलिदान और मानवता, जरूर पढ़ें बढ़ेगी आस्था

June 16, 2026

छबील : हर बूंद में त्याग, बलिदान और मानवता, जरूर पढ़ें बढ़ेगी आस्था

Chhabeel Sacrifice, sacrifice and humanity : तपती दोपहरी, झुलसाती गर्म हवाएं और प्यास से बेहाल राहगीर। ऐसे में सड़क किनारे खड़े कुछ लोग मुस्कुराते हुए मीठा और ठंडा पानी बांटते नजर आते हैं। देखने में यह सब एक सामान्य प्रक्रिया नजर आती है, लेकिन छबील की हर बूंद अपने भीतर त्याग, बलिदान और मानवता की एक अमर गाथा समेटे है।

गुरु जी को दी जा रही थीं यातनाएं

यह केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि सिख धर्म के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को श्रद्धापूर्वक याद करने की परंपरा है। इतिहास के पन्नों में दर्ज वह दर्दनाक क्षण, जब गुरु अर्जुन देव जी ने असहनीय यातनाएं सहते हुए भी धैर्य, शांति और मानवता का मार्ग नहीं छोड़ा, आज भी लाखों श्रद्धालुओं को सेवा और परोपकार की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि हर साल भीषण गर्मी में लगाई जाने वाली छबील केवल शरबत या पानी का वितरण नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, समानता और इंसानियत का जीवंत संदेश बन जाती है। ऐतिहासिक घटनाक्रम के मुताबिक, जब मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर गुरु अर्जुन देव जी को लाहौर में तपती लोहे की तवे पर बिठाकर और उबलते पानी में डालकर अमानवीय यातनाएं दी जा रही थीं, तब इस घोर पाप में शामिल पापी चंदू की पुत्रवधू का दिल तड़प उठा।

नहीं पिया गुरु जी ने शरबत

वह छिपते-छिपाते गुरु जी के पास पहुंची और अत्यंत व्याकुल होकर उनसे थोड़ा सा ठंडा शरबत पीने की मिन्नत करने लगी ताकि उनके छाले पड़ चुके शरीर को थोड़ी शांति मिल सके। क्रूर यातनाओं के बीच भी अडिग और शांत बैठे गुरु अर्जुन देव जी ने उस महिला की श्रद्धा और तड़प को देखा। तब गुरु जी ने शांत स्वर में वचन दिया, माता! इस मुख से तो मैं तुम्हारा यह शरबत नहीं पीयूंगा, इतिहास में ऐसा एक समय जरूर आएगा जब यह शरबत जो तुम आज मेरे लिए लाई हो, तुम्हारे इस सेवा भाव के नाम पर दुनिया भर में हजारों लोग इस शरबत को राहगीरों को पिलाएंगे और लोग इसे पीएंगे। तुम्हारी यह सेवा और तड़प हमेशा के लिए सफल होगी। गुरु जी के इसी पावन वचन के बाद से हर साल उनके शहीदी दिवस पर दुनिया भर में मीठे पानी की छबीलें लगने लगीं।

जब गुरु जी से लिया शहादत का आशीर्वाद

शरबत न पीने के बाद जब चंदू की पुत्रवधू बेहद भावुक हो गई तो उसने गुरु जी के चरणों में एक और अंतिम विनती रखी। उसने कहा कि महाराज मुझे पता है कि कल आपको शहीद कर दिया जाएगा। मेरी आपसे एक ही प्रार्थना है कि कल जब आप इस नश्वर संसार को छोड़कर अपनी देह रूपी चोला त्यागेंगे तो मैं भी उसी क्षण प्राण छोड़ दूं। मैं समाज के और लोगों के ये ताने सहते हुए जिंदा नहीं रह सकती कि देखो यह पापी चंदू की बहू जा रही है, जिसके ससुर ने हमारे गुरु अर्जुन देव जी को इतनी बेरहमी से शहीद करवाया।

गुरु जी ने कर दिया चंदू की बहू को अमर

इतिहास गवाह है कि अगले दिन जब पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी ने रावी नदी के ठंडे पानी में डुबकी लगाकर अपनी शहादत दी, तो ठीक उसी समय दूसरी तरफ चंदू की उस पुत्रवधू ने भी संसार से विदा ले ली और अपना शरीर त्याग दिया। गुरु जी ने अपनी शहादत से पहले ही उसके कलंक को धोकर उसकी सेवा को अमर कर दिया था। यही वजह है कि आज सदियों बाद भी जब भीषण गर्मी में छबीलें लगती हैं, तो वह उसी निश्छल सेवा और गुरु वचन की याद दिलाती हैं।

Also Read :

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें