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तेलंगाना के कस्तूरबा गांधी स्कूल में बच्चों की सेहत से खिलवाड़, कीड़ों वाला खाना और गंदा पानी पीने को मजबूर छात्र

kasturba gandhi residential school worm infested rice

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नेशनल डेस्क: तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के येल्लारेड्डी स्थित कस्तूरबा गांधी रेजिडेंशियल स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें खाने में कीड़े वाला चावल परोसा जा रहा है। इसके साथ ही पीने के लिए साफ पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे बच्चों को काफी परेशानी हो रही है।

छात्रों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद स्कूल प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। खराब भोजन और दूषित पानी की वजह से बच्चों की तबीयत बिगड़ने का खतरा बना हुआ है, लेकिन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

पूर्व विधायक के दौरे में छलका छात्रों का दर्द

शुक्रवार को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के पूर्व विधायक जजाला सुरेंद्र ने येल्लारेड्डी स्थित कस्तूरबा गांधी रेजिडेंशियल स्कूल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों से सीधे बातचीत की और स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। बातचीत के दौरान कई छात्र भावुक हो गए और रोते हुए अपनी परेशानियां बताईं।

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छात्रों ने पूर्व विधायक को बताया कि उन्हें रोजाना खराब गुणवत्ता का चावल दिया जा रहा है, जिसमें कीड़े होते हैं। इसके अलावा पीने के लिए जो पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, वह भी साफ नहीं है। ऐसी स्थिति में रहना और पढ़ाई करना उनके लिए बहुत मुश्किल हो गया है।

जजाला सुरेंद्र का राजनीतिक सफर

जजाला सुरेंद्र येल्लारेड्डी विधानसभा क्षेत्र से तेलंगाना विधानसभा के पूर्व विधायक रह चुके हैं। वह वर्तमान में भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता हैं। उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस (कांग्रेस) के टिकट पर येल्लारेड्डी सीट से जीत हासिल की थी और उन्हें कुल 91,510 वोट मिले थे। इसके बाद वर्ष 2019 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर BRS (तत्कालीन TRS) पार्टी का दामन थाम लिया। 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में BRS ने उन्हें येल्लारेड्डी से उम्मीदवार बनाया, लेकिन इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार मदन मोहन राव से हार का सामना करना पड़ा।

स्कूलों में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने कस्तूरबा गांधी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और छात्रों को कब तक सुरक्षित भोजन और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाती हैं।

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