Last Updated: September 21, 2026

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न्याय सभी के लिए सुलभ होना चाहिए, केवल संपन्न लोगों के लिए नहीं: CJI सूर्यकांत

June 7, 2026

न्याय सभी के लिए सुलभ होना चाहिए, केवल संपन्न लोगों के लिए नहीं: CJI सूर्यकांत

नेशनल डेस्क: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा है कि न्याय व्यवस्था का असली उद्देश्य केवल उन लोगों को न्याय दिलाना नहीं है, जो अदालतों में मुकदमा लड़ने का खर्च उठा सकते हैं, बल्कि देश के हर नागरिक तक न्याय पहुंचाना है। न्यायपालिका ऐसी संस्था होनी चाहिए, जिसका संरक्षण और भरोसा समाज के सबसे कमजोर और अंतिम व्यक्ति तक महसूस किया जा सके।

लंदन में छात्रों से किया संवाद

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लंदन स्थित क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका, जनता के विश्वास, न्याय तक पहुंच और भविष्य की कानूनी व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।

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पारदर्शिता से बनता है जनता का विश्वास

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास केवल किसी पद या अधिकार के कारण नहीं मिलता। जनता का भरोसा हासिल करने के लिए संस्थाओं को पारदर्शी, जिम्मेदार और लगातार सुधार करने वाला होना पड़ता है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है, लेकिन इसके साथ-साथ उसकी जिम्मेदारी संविधान और देश के नागरिकों दोनों के प्रति भी होती है। इसलिए न्यायिक संस्थाओं को हमेशा जवाबदेही और निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।

राष्ट्रीय न्यायिक नीति की जरूरत

मुख्य न्यायाधीश ने देश में एक समान राष्ट्रीय न्यायिक नीति लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि जब विभिन्न अदालतों के फैसलों में अधिक एकरूपता होगी तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा। इससे कानून के शासन को भी मजबूती मिलेगी और न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।

न्याय व्यवस्था में तकनीक की बढ़ती भूमिका

तकनीक के महत्व पर चर्चा करते हुए सूर्यकांत ने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी ने आम लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को पहले की तुलना में अधिक आसान बना दिया है। ऑनलाइन सुनवाई, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सुविधाओं ने न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद की है। नई तकनीकों को अपनाते समय न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना होगा कि निष्पक्षता, समानता और न्याय तक सभी की पहुंच जैसे संवैधानिक मूल्यों से कोई समझौता न हो।

न्याय मिलने का एहसास सबसे बड़ी संतुष्टि

अपने संबोधन के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी न्यायाधीश के लिए सबसे संतोषजनक क्षण वह होता है, जब किसी व्यक्ति को यह महसूस हो कि उसकी बात पूरी ईमानदारी से सुनी गई और उसे न्याय मिला है। न्यायपालिका का अंतिम लक्ष्य लोगों का विश्वास बनाए रखना और सभी नागरिकों को समान रूप से न्याय उपलब्ध कराना है।

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