Site icon Dainik Savera Times

जनगणना का मौजूदा स्वरूप सिर्फ ‘धोखा’ और लीपापोती’, यह स्वीकार नहीं: कांग्रेस

नई दिल्लीः कांग्रेस ने जनगणना की प्रश्नावली को लेकर सोमवार को सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि मोदी सरकार द्वारा जिसे तरीके से यह प्रक्रिया कराई जा रही है, वह जनता के साथ ”धोखा” तथा लीपापोती है और पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार को वर्तमान प्रश्नावली को रद्द कर, सभी राजनीतिक दलों तथा विशेषज्ञों के साथ बातचीत के बाद नए सिरे से प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी द्वारा लिखे गए हालिया पत्र का हवाला देते हुए कहा, ”जिस तरह से ये जनगणना कराई जा रही है, उसे हम स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि यह सिर्फ लीपापोती है।” रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पहले कई वर्षों तक जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहते थे, लेकिन इसकी घोषणा के बाद से लगातार ”यू-टर्न” ले रहे हैं।कांग्रेस नेता ने कहा कि खरगे और गांधी ने इस विषय पर प्रधानमंत्री को कई पत्र लिखे हैं लेकिन अब तक उनका कोई जवाब नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को नहीं छोड़ेगी और उम्मीद करती है कि प्रधानमंत्री मोदी पार्टी नेताओं के पत्रों तथा उनमें दिए गए सुझावों को गंभीरता से लेंगे।रमेश ने 21 सितंबर, 2021 को शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि उसमें कहा गया था कि जातिगत जनगणना कराने के लिए पहले से जातियों की सूची तैयार करनी होगी।

उन्होंने कहा कि बिहार में जातिगत सर्वेक्षण के दौरान 215 जातियों की सूची तैयार की गई थी और तेलंगाना में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई थी। कांग्रेस महासचिव का कहना था, ” देश में करीब 4,200 जातियां हैं और प्रत्येक राज्य के पास जातियों की अपनी सूची है, जिसके आधार पर आरक्षण दिया जाता है। केंद्र सरकार के पास भी अपनी सूची है।”

रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो उसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्रों को संज्ञान में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार और तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण के लिए अपनाई गई व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकता है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पार्टी ने 2023 और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान जातिगत जनगणना की मांग की थी, लेकिन उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस की इस मांग को ”शहरी नक्सल” वाली सोच बताया था।

उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने घोषणा की कि 2027 में जातिगत जनगणना कराई जाएगी, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना के संबंध में कुछ सुझाव दिए थे।

रमेश के अनुसार, कांग्रेस लगातार मांग करती रही है कि सभी राजनीतिक दलों से चर्चा की जाए, राज्य सरकारों से सुझाव लिए जाएं और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए जातिगत जनगणना कराने पर विचार किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर ”चुप्पी साधे हुए है” और अब तक किसी से चर्चा नहीं की गई है।

Exit mobile version