Conquer the Manali-Leh route by bicycle : रोहतक। उम्र सिर्फ एक संख्या है, हौसलों की कोई सीमा नहीं होती। 68 वर्षीय साइक्लिस्ट कमलेश राणा ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। बर्फीले पहाड़ों, दुर्गम चढ़ाइयों और चुनौतीपूर्ण मौसम से जूझकर मनाली-लेह के 350 किलोमीटर लंबे कठिन रूट को साइकिल से सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस साहसिक उपलब्धि ने न केवल उनकी फिटनेस और जज्बे की मिसाल पेश की, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश दिया। रोहतक लौटने पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और ‘आपके साथ एक नई शुरुआत’ संस्था ने उनका गर्मजोशी से सम्मान किया। झज्जर रोड पर आयोजित सम्मान समारोह में महंत थानेश्वर दास उदासीन, योगाचार्य हरिओम कौशिक, रक्तदाता प्रेरक जेपी गौड़, सोनू छाबड़ा, नीलम आर्य और विजेंद्र कादयान ने कमलेश राणा को उनके उज्ज्वल स्वास्थ्य की कामना की। महंत थानेश्वर दास उदासीन ने कहा कि कमलेश राणा युवा लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने साबित किया है कि उम्र केवल एक संख्या है और मजबूत इच्छाशक्ति से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
योगाचार्य हरिओम कौशिक ने बताया कि कमलेश राणा की फिटनेस और सफलता का मुख्य आधार नियमित योगाभ्यास है। उन्होंने कहा कि वे प्रतिदिन योग करती हैं, जिससे उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना करने की ऊर्जा मिलती है। रक्तदाता प्रेरक जेपी गौड़ ने बताया कि कमलेश राणा हरियाणा नशा मुक्ति साइक्लोथान की विजेता रह चुकी हैं। इसके अलावा वे कश्मीर से कन्याकुमारी, रोहतक से नेपाल के काठमांडू तक साइकिल यात्राएं कर चुकी हैं और विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि मनाली से लेह तक की 350 किलोमीटर की यह यात्रा पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण मार्ग होने के कारण आठ दिनों में पूरी की गई।
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