चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा सचिवालय में पदोन्नति प्रक्रिया के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सचिव राजीव प्रसाद को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।
ऐसे की कोर्ट की अवमानना
जस्टिस संदीप मौद्गिल ने कहा कि अदालत के पूर्व यथास्थिति आदेश के बावजूद यदि पदोन्नति की है तो यह प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना का मामला है। अदालत ने सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके विरुद्ध अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। मामला याचिकाकर्ता राजेश कुमार की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई के दौरान उठा। याचिका में आरोप लगाया गया कि 22 जनवरी को हाई कोर्ट द्वारा पदोन्नति मामलों में यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद 30 मार्च को राजिंदर सिंह को नवसृजित डिप्टी सेक्रेटरी (डिबेट्स) पद पर एडिटर आफ डिबेट्स के रूप में पदोन्नत कर दिया गया।
ये है पूरा मामला
याचिकाकर्ता का कहना था कि यह कार्रवाई अदालत के आदेशों की खुली अवहेलना है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि विधानसभा सचिवालय में रिपोर्टर कैडर से वरिष्ठ रिपोर्टर अथवा चीफ रिपोर्टर पदों पर पदोन्नति के लिए वरिष्ठता-सह-योग्यता के नियम लागू हैं, लेकिन विभाग ने बिना अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार किए ही पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं विभाग ने स्वीकार किया है कि रिपोर्टर्स की वरिष्ठता सूची अभी विचाराधीन है। ऐसे में बिना सूची अंतिम किए पदोन्नति देना मनमाना, अवैध और अधिकारों का दुरुपयोग है।
हाईकोर्ट ने मामले में दिखाई गंभीरता
हाईकोर्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने अगली सुनवाई 15 मई तय करते हुए तब तक पदोन्नति संबंधी स्थिति यथावत रखने के निर्देश दोहराए।
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