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AIMIM नेता शौकत अली का विवादित बयान- हिंदू भाइयों को 4 नहीं, 14 बच्चे पैदा करने चाहिए

AIMIM leader Shaukat Ali

AIMIM leader Shaukat Ali

नेशनल डेस्क: मुजफ्फरनगर में बुधवार देर शाम आयोजित दो नुक्कड़ सभाओं में एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने जनसंख्या, धार्मिक स्वतंत्रता और मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर कई तीखे बयान दिए। उनके भाषण के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और नए विवाद की संभावना भी जताई जा रही है।

जनसंख्या बढ़ाने की वकालत

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चल रही बहस पर बोलते हुए शौकत अली ने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए आबादी का बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कुछ हिंदू संगठनों द्वारा ‘चार बच्चे’ की बात कहे जाने का जिक्र करते हुए तंज किया कि अगर ऐसा है तो हिंदू भाइयों को चार नहीं, बल्कि 14 बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की बड़ी आबादी ही उसकी ताकत का एक कारण है। भारत को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत बनना है तो जनसंख्या को बोझ नहीं, बल्कि शक्ति के रूप में देखना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर जनसंख्या सच में बड़ी समस्या है तो फिर ‘हम दो, हमारे दो’ जैसा सख्त कानून क्यों नहीं लागू किया जाता।

बाबरी मस्जिद के नाम पर विवाद पर प्रतिक्रिया

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से हो रहे निर्माण को लेकर उठे विवाद पर भी शौकत अली ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धार्मिक स्थल का नाम रखने की आजादी देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चे का नाम बाबर रखता है और आगे चलकर वह कोई काम शुरू करता है, तो क्या उसे सिर्फ नाम के आधार पर रोका जाएगा? उनका कहना था कि नाम को लेकर राजनीति करना सही नहीं है।

मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव का आरोप

अपने संबोधन में शौकत अली ने यह भी आरोप लगाया कि देश में मुसलमानों को उनकी पहचान के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है। दाढ़ी, टोपी और गोश्त जैसे मुद्दों को लेकर लोगों को परेशान किया जाता है। उन्होंने मॉब लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए चिंता का विषय हैं और सरकार को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए।

चुनावी रणनीति और सरकार पर निशाना

2022 के चुनाव में मिली हार को स्वीकार करते हुए शौकत अली ने कहा कि पार्टी अब जिला पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है। सरकार के बजट पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि इसमें आम जनता के लिए कोई ठोस राहत नहीं है। उनके मुताबिक, बजट में किए गए वादे जमीनी हकीकत से दूर हैं। मुजफ्फरनगर में दिए गए इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब देखना होगा कि इस पर अन्य दलों और संगठनों की क्या प्रतिक्रिया आती है।

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